08 अप्रैल, 2018

शैतान की कोई आत्मा नहीं होती




तुम्हारी मृत्यु सोचकर
मेरे अंदर कोई वेदना नहीं होती
जब तब एक घायल पंछी सिहर जाता है
यह सोचकर,
कि अब क्या उड़ना ?
ज़िन्दगी बीत गई कांपते हुए !
कुछ दिन पहले तक लगता रहा
कि अपमान का क्रम भी रुक जाए
टूट जाए
तो एक खालीपन उभरता है
लेकिन,
तुम्हारी शर्तों की हुकूमत
मेरे भीतर अट्टाहास करती है
ऐसे,
जैसे
भूत आ गया हो शरीर पर !
सच,
कई बार मन होता है
भूत खेलवाने जैसी हरकत करूँ
तुम्हारे सिरहाने से तकिया खींचकर फेंक दूँ
आग्नेय नेत्रों से तुम्हें देखूँ
और पूछूँ  ...
अपने किये का
कोई हिसाब किताब है तुम्हारे पास ?
झूठमूठ टेसुए बहाते
आत्मा नहीं कोसती ?
क्या कोसेगी,
शैतान की कोई आत्मा नहीं होती न !

7 टिप्‍पणियां:

  1. शायद भूत शैतान की आत्मा होता है। ऐसा सुना था अभी तक यही समझ में आता है। अब अपने अन्दर कैसे देखे कोई क्या है :)

    सुन्दर।

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  2. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ०९ अप्रैल २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' ०९ अप्रैल २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक में आदरणीय 'रवींद्र' सिंह यादव जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है।

    अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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  3. शैतान कोई आतमा नही होती
    तम ही शैतान होता है
    नमन
    सादर

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (10-04-2017) को "छूना है मुझे चाँद को" (चर्चा अंक-2936) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. शैतान और आत्मा ... शायद नहि है आत्मा तभी तो वी शैतान है ... मृत है ऐसा इंसान ...
    गहरी रचना ...

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  6. शैतान की कोई आत्मा नहीं होती न !!!! बेहद गहन अभिव्यक्ति

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  7. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन घनश्याम दास बिड़ला और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

    उत्तर देंहटाएं

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