04 अगस्त, 2008

एक अदद आया.......


वह दिन दूर नहीं,
जब पढ़ी-लिखी लडकियां
'आया' की जगह के लिए अप्लाई करेंगी !
बहुत सारी कंपनियों की तुलना में
एक आया
अधिक कमाने लगी है,
क्योंकि -
उसकी मांग और ज़रूरत बढ़ गई है........
बोनस पॉइंट -
paid leave ,
रहने की सुविधा ,
मेडिकल सुविधा ,
फ्री प्रसाधन सामग्री ,
कपड़ा हर त्यौहार पर !
..........
अचानक गायब होने पर
ज़ोर की डांट भी नहीं,

कभी भी खतरे की घंटी बजा सकती है ,

पैरों तले ज़मीन हटा सकती है !

.......

इतनी सारी सुविधाओं के साथ ,

..... आकर्षक आय ,

कभी भी बढ़वाने का मौका ,

एक्स्ट्रा वर्क - एक्स्ट्रा मनी

और...........

खुशामद की चाशनी !


23 टिप्‍पणियां:

  1. क्योंकि -
    उसकी मांग और ज़रूरत बढ़ गई है........
    बोनस पॉइंट -
    paid leave ,
    रहने की सुविधा ,
    मेडिकल सुविधा ,
    फ्री प्रसाधन सामग्री ,
    कपड़ा हर त्यौहार पर !

    ati sundar........

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  2. जमाना बदल गया है नए ज़माने को बहुत अच्छे से प्रस्तुत किया गया है लेकिन ये जानकर तो दुःख हुआ हर चीज़ को पैसो से तोला जा रहा है चाहें वो माँ के समान किसी आया का आँचल क्यूँ ना हो ...

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  3. सब शिक्षण पद्दति का दोष है मासी जी, ये हमें Money multiplication तो सिखाती है लेकिन वास्तविक जीवन जीने की कला नहीं सिखला पाती | Commercial Education इंसान के ego को बढा देता है, परिणाम स्वरुप छोटे छोटे किन्तु महत्वपूर्ण घरलू कार्यो के प्रति या तो हम उदासीन हो जाते है या फिर करते हुए हीनता महसूस करते है, तो जैसा की आपने कहा वाकई वह दिन दूर नहीं जब घरेलु कार्यो के लिए लोग नहीं मिलेंगे और जो मिलेंगे वे So Called पढ़े लिखे लोगो से कही ज्यादा अर्थोपार्जन कर जायेंगे और पढ़े लिखे लोग कुंठाग्रस्त होकर कही के नहीं रह जायेगे |

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  4. रश्मि जी, हमारे यहां (९९,९%)लोग पढे लिखे हे,यानि आया की नोकरी करने के लिये पहले स्कुल फ़िर ३,से ५ साल का कोर्स, हमे किसी भी काम मे शर्म नही आनी चाहिये,भीख चोरी ओर अन्य गलत कामो से जरुर शर्म करनी चाहिये, मेरे बच्चे ११वी मे हे,ओर कार के लाईसेंस बनबाने के लिये इन्हे पेसा चाहिये, ओर हर शुकर वार को यह घरो मे समाचार पेपर डाल कर आते हे, हमारे यहां मेहनत करने वाले को ज्यादा इजाज्त दी जाती हे, काश मेरे भारत मे भी सभी लोगो के विचार ऎसे हो.
    आप की कविता बहुत अच्छी लगी,धन्यवाद

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  5. वाह दी, क्या खूब तरीके से आपने सच्चाई को उभारा है हास्य और विनोदी रंग दे के..
    और अब तो ये सच्चाई भी है, कि स्वीपर की पोस्ट में जब बड़े से बड़े कास्ट के और बी एड, डिप्लोमा करे हुए बेरोजगार लड़के आवेदन कर रहे हैं तो आया की पोस्ट में भी पढ़ी लिखी लड़किया करेंगी.. क्यूँ की सच में जो-जो आपने कहा ऐसा ही हो रहा है आजकल.. और इसे गंभीरता से पहने की बजाये विनोदी स्वभाव में ही पढना चाहिए.. आप अपनी और सबकी समस्या सामने रख रही हैं, किसी का मजाक नहीं उड़ा रही हैं की किसी को बुरा लगे.. और जिसको बुरा लगे उस-से केवल इतना ही कहूँगा की कृपया आप भाव को समझें की क्या क्या परेशानी उठानी पड़ती है पूरी पगार देने के बाद भी जब खुद बर्तन माजने पड़े अक्सर तो ग्रहणी के दिल में ऐसे नहीं तो और कैसे विचार आयेंगे? और हास्य में दिमाग नहीं केवल दिल का इस्तेमाल किया जाता है, क्यों कि एक तो वैसे है हसने का ही वक़्त नहीं बचा हम लोगो के पास, कोई हसाना चाहे भी तो उसका मुह बंद कर देंगे तो कौन हसायेगा फिर? इसलिए इस कविता को पढिये और हासिये दिल खोलकर.. हा हा हा हा हा हा...!!!

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  6. raj ji ki bata se mein sahmat hun rashmi ji...
    par apka khyaal isaayawali bata pe bahut satik hai....acha likha hai apne lekhan ki dristhi se..

    lekin aaya ki ahmiyat bhi to ham sabke karan hi badti hai na aksar..

    sabse huda soch pe..hardik badhayee

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  7. नया ज़माना ..नई है सोच अच्छी लिखी है कविता

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  8. बहुत अच्छ लिखा है ....लोगो की सोच बदल रही है

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  9. जी सही कहा है आपने, इन आया का मोल तो अपनों से भी ज्यादा हो गया है। अजी, जमाना बदल गया है, बदले हुए जमाने के साथ आपकी ये बदली हुई रचना अच्छी लगी। सुंदर...अति सुंदर।।।।

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  10. रशिम जी मेरे कहने का भाव मात्र इतना ही था कि कोइ भी काम बुरा,या छोटा बडा नही होता,किसी को बुरा लगे तो माफ़ी चाहता हू
    आप की कविता बहुत ही सुन्दर लगी,ओर आप की कविता की तारीफ़ करना तो सुरज को रोशनी दिखाने के बराबर हे,आप सच मे बहुत सुन्दर लिखती हे.

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  11. जिनता मजा काव्‍य पढ़ने में आया उतना ही टिप्‍पणी

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  12. tab sayad "aaya" ko aaya ya servant nahi kaha jayega......unke liye koi naya shabd dhundh liya jayega...........sayad House Helping Executive ya kutchh aise hi shabd.........:P

    bahut khub!!

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  13. aansu mein naa dhundhna hame,
    hum tumhe aankhon mein mil jaayenge,
    tamanna ho agar milne ki to
    band aankhon se bhi nazar aaenge.

    bahut achcha likhti hain aap.
    ...Ravi

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  14. रचना अच्छी है....रशिम जी

    बधाई |

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  15. आया के बहाने आज की नारी का दर्द समझा आपने। शायद कल आया का भी दर्द समझो।

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  16. इस कविता में मैंने आज की परिस्थिति को दिखाया है,
    जहाँ समानता की दौड़ में लोग घरेलु कार्य से दूर हो गए हैं,बहुतों को
    आता भी नहीं , तो काम करनेवाली की आवश्यकता बढ़ गई है और
    पैसा इतना बढ़ गया कि आम लोग देने में असमर्थ हो गए......
    तो मैंने एक हास्य प्रस्तुत किया कि अंत में इसी के लिए आवेदन पत्र दिए जायेंगे,
    पसंद करने के लिए शुक्रिया.....

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  17. hi how ru mam
    mam plzz send me some good shayari
    i am waiting plzz

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  18. अचानक गायब होने पर
    ज़ोर की डांट भी नहीं,


    कभी भी खतरे की घंटी बजा सकती है ,

    पैरों तले ज़मीन हटा सकती है !

    बहुत बढ़िया लिखा है...

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  19. simply great...naye jamane ke naya bichar aour us par ek garma garam kavita...keep it up..n keep going

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शाश्वत कटु सत्य ... !!!

जब कहीं कोई हादसा होता है किसी को कोई दुख होता है परिचित अपरिचित कोई भी हो जब मेरे मुँह से ओह निकलता है या रह जाती है कोई स्तब्ध...