19 अगस्त, 2008

एक कप कॉफी............


बादलों की गर्जना,
कड़कती बिजली,
बारिश की तेज बौछारें,
मंद-मंद हवाएं !
हल्की ठण्ड का आलम है............
एक गर्मागर्म कॉफी हो जाए!
.........
कॉफी और मौसम तो बस बहाना है-
साथ बैठने का,
रिश्तों की खोई गर्मी को लौटाने का.........
बादल तो फिर चले जायेंगे,
बिजलियों की कड़क,
बारिश की फुहारें थम जाएँगी,
मुमकिन है कॉफी ठंडी हो जाए!
पर अगर हाथ थाम लो
तो जीवन की राहें आसान हो जाएँ
और कॉफी की खुशबू साथ हो जाए............

35 टिप्‍पणियां:

  1. jarur ho jaye cofee ek cup......

    aha laga risto me garmi ka ehsas dilatee cofee ka test

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  2. पर अगर हाथ थाम लो
    तो जीवन की राहें आसन हो जाएँ
    और कॉफी की खुशबू साथ हो जाए.........

    सही कहा आपने ..यादे यूँ जोड़ने का कुछ तो बहाना चाहिए ,,यह अंदाज़ भी बहुत भाया दिल को

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  3. शानदार गरमा गरम कौफ़ी के लिये शुक्रिया.साथ ही साथ कविता की बरसात में भिगोने का भी शुक्रिया.

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  4. बहुत खूब. शानदार.
    बेहतरीन..... उम्दा....
    पढ़ कर अच्छा लगा

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  5. bahut sundar....
    sach hi hai coffee to matr ek bahaana hai apane rishton men garmaahat lane ka.

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  6. तो जीवन की राहें आसन हो जाएँ
    और कॉफी की खुशबू साथ हो जाए............

    sachmuch ham jaise coffee lover to khushbu se hi khush ho jate hain.

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  7. कॉफी और मौसम तो बस बहाना है-
    साथ बैठने का,
    रिश्तों की खोई गर्मी को लौटाने का.........
    aaye na delhi ek coffee ho jaye..bahut mitas hain es coffee main aur payar bhri...dil ke pass coffee

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  8. बरसाते आती रही भिगोती भी होंगी
    कोई बूँद बालों से टपक कर
    होठों तक जाती होगी
    और भीगे ठिठुरते तन मन मे
    कोई ख्याल मेरा दे जाती होगी ..
    और एक कप गर्म कॉफी
    सारे माहौल मे बिखेर जाती होगी ......

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  9. मानवीय संबंधों को व्यक्तिगत सन्दर्भ में चित्रित करना एक मनोवैज्ञानिक कसरत के सामान के होता है ..व्यक्ति से जुडी aur आस पास बिखरी घटनाओं और पास पड़ी जड़-अजड़ वस्तुओं में एक अनजाना सा गहरा जुडाव होता है जिन्हें रेखांकित करना सरल नहीं ! कई साधारण सी दिखने वाली परिस्थितियां अपने चारों ओर गहरा भावनात्मक आलोक बिखेरती हैं जिन्हें आपने बखूबी महसूश किया और बहोत खूबसूरती से कागज पे उकेरा है..आपकी इस छोटी सी सरल !! एक कप कॉफी हो जाए !! में प्यार,पीडा,उम्मीद,एक अलसाई हुई सी कशमकश ;रिश्तों में जमी बर्फ ;जज्बातों की गुलाबी तपिश ...सब कुछ कितने जीवंत लग रहे हैं.!
    ...देश.

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  10. अच्छा है. बहुत अच्छा है.

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  11. आज पहली बार आपकी रचना पढ़ी वास्तव में बहुत सुंदर है। आपने सीधे सरल शब्दों में जो व्यक्त किया है बदलों की गर्जन कड़कती बिजली,बारिश की तेज बौछारें,उस कष्ट को दर्शाता है जो ईश्वर से दूर रहने पर होता है और ये मंद-मंद हवाएं ईश्वर की आराधना का सुख है जो हल्की ठण्ड का आलम का सुख देता है कॉफी और मौसम तो बस बहाना है-
    तात्पर्य है कि पूजा पाठ और ईश्वर की अराधना तो एक रास्ता है रिश्तों की खोई गर्मी को लौटाने का..(ईश्वर के सामिप्य का).. जिससे दुख रूपी बिजलियों की कड़क,बारिश की फुहारें थम जाएँगी,
    हो सक है ईश्वर की अराधना करते-करते कंठ अवरुद्ध हो जाए उम्मीद का दामन छूटने लगे (अर्थात मुमकिन है कॉफी ठंडी हो जाए!)किंतु है ईश्वर अगर तेरे हाथ का सहारा मिल जाए तो जीवन के सब कष्ट दूर हों जीवन में तेरे प्रेम की महक हीमहक हो...

    इतने सुंदर भावों से सराबोर कविता वास्तव में जीवन का सार देती है ..........धन्यवाद..बधाई

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  12. कॉफी और मौसम तो बस बहाना है-
    साथ बैठने का।

    सही बात। जीवन में अक्सर ऐसा हो जाता है कि साथ बैठने के भी बहाने खोजने पडते हैं।

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  13. कॉफी और मौसम तो बस बहाना है-
    साथ बैठने का,
    रिश्तों की खोई गर्मी को लौटाने का.........
    बादल तो फिर चले जायेंगे,
    बहुत सुन्दर लिखा है। पढ़कर आनन्द आगया। बधाई स्वीकारें।

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  14. आज की भागम-भाग ज़िन्दगी मे ऐसे खूबसूरत लम्हे के लिये शुक्रिया..

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  15. गर्मागर्म कॉफी कविता बहुत अच्छी है कल इसकी समीक्षा लिखना चाहूंगा..बधाई

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  16. आप की शानदार गरमा गरम कौफ़ी की खुशबू ने मस्त कर दिया , बहुत अच्छी लगी , धन्यवाद

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  17. पर अगर हाथ थाम लो
    तो जीवन की राहें आसन हो जाएँ
    और कॉफी की खुशबू साथ हो जाए............

    waah.....

    yahee khushboo
    pag ko phira se degee gati,
    tho aaiye chaliye peethe haiM cofee

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  18. .

    एक नयी ऊष्मा प्रवाहित करती रचना !

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  19. excellent mam........आपने बिल्कुल सही लिखा है,आजकल हर काम के लिए बहाना चाहिए! रिश्ते निभाने के लिए भी बहाना चाहिए !मगर जहाँ तक मेरा मानना है,ये बहाना दो दिलो के बीच नहीं आना चाहिए!किसी के साथ जबरदस्ती बैठकर कॉफी पीना या कोई मेरे साथ जबरदस्ती बैठकर कॉफी पिए,ऐसा होने से कॉफी का स्वाद बिगड़ जाता है!जो रहना नहीं चाहता उसे रोकने की चेष्टा करना उसे और खोना है....मौसम तो आते-जाते रहते है,मगर रिश्ते खो गए तो बहुत मुश्किल से दुबारा मिलता है,या फिर मिले भी नहीं...............

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  20. sundar..

    purani yaadein tazara ho gayi..!

    mere yu barish me bheegna aur unka garm garm coffe bana lana..!

    aur EK CUP COFFEE share kar lena..!

    KAASAH..tum hote to shayad sun pate..!!

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  21. sadar abhivadan
    pant jee ke bitiya or unake bitiya ko
    mukul ka pranam
    aapake is kavita men anokha pan hai
    उतने ही शब्द-
    मेरी पिटारी में डाल दिए....!
    हिसाब कच्चा नहीं तुम्हारा,
    जब भी घायल करते हो,
    कुछ शब्द दे जाते हो....!
    इन्ही शब्दों को लिए
    मैं घायलों को तलाशती हूँ
    और शब्दों का व्यापार करती हूँ!!!

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  22. Khubshurat kavita ke sath ek akarshak amantran, Soch raha hu ki ek cup garmagaram coffie ho hi jaye :)

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  23. very very nice n beautifull poem..
    waise bhi mujhe coffee aour chai bahut achhi lagati hai aour wo bhi doston ke saath to phir kehna hi kya.

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  24. bahut sundar rachna hai congratulation . if u have a little time please viti to my blogs too manoria.blog.co.in and manoria.blogspot.com

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  25. ठंडे जमे रिश्तो मे कुछ इस तरहां गर्माहट आई है जो बयान नहीं कि जा सकती......बहुत अच्छे

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  26. बरसात में गर्म चाय काफी के बात ही निराली है और इस पर आपने बहुत ही सच्ची बात कही कि..

    बारिश की फुहारें थम जाएँगी,
    मुमकिन है कॉफी ठंडी हो जाए!
    पर अगर हाथ थाम लो
    तो जीवन की राहें आसान हो जाएँ
    और कॉफी की खुशबू साथ हो जाए........
    बहुत अच्छी प्रेरक रचना ..आभार

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  27. बहुत खुबसूरत .प्यारी रचना...
    :-)

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अक्षम्य अपराध

उसने मुझे गाली दी .... क्यों? उसने मुझे थप्पड़ मारा ... क्यों ? उसने मुझे खाने नहीं दिया ... क्यों ? उसने उसने उसने क्यों क्यों ...