29 जून, 2011

तुम पर है



मैं एक विचार हूँ
अब तुम पर है- मुझे किस तरह लेते हो
मैं सत्य हूँ निर्बाधित विचारों का
अब तुम पर है - मुझे किस तरह लेते हो
तुम अगर इन विचारों को तोड़ते मरोड़ते हो
झूठ के पिरामिड बनाते हो
फिर तो मैं हूँ ही नहीं कहीं
मुझे ढूंढना , उलाहने देना निरर्थक है
अंत अवश्यम्भावी है
मेरे संग चलो सुकून से
या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....
यह सब तुम पर है
सिर्फ तुम पर !

55 टिप्‍पणियां:

  1. मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....

    किसी हद तक ऐसा ही होता है ...तब यही कहना होता है जैसा आपने कहा है ...गहरे उतरते शब्‍द ।

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  2. मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....
    यह सब तुम पर है
    सिर्फ तुम पर !

    बिलकुल सही कहा आपने.

    सादर

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  3. एक और गंभीर और खूबसूरत कविता....

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  4. .गंभीर सोच,गहरे शब्द कुल मिलाके खूबसूरत कविता.,,,

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  5. तुम अगर इन विचारों को तोड़ते मरोड़ते हो
    झूठ के पिरामिड बनाते हो
    फिर तो मैं हूँ ही नहीं कहीं
    मुझे ढूंढना , उलाहने देना निरर्थक है

    बहुत खूब रश्मि जी वाकई एक पिरामिड में या एक बंद दायरे में सत्य को तलाशा भी नहीं जा सकता

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  6. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति| धन्यवाद

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  7. सत्य को और व्यक्तित्व को हर ओर से तौलते हैं लोग।

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  8. अंत अवश्यम्भावी है
    मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....

    बहुत सुन्दर सारगर्भित प्रस्तुति..

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  9. मैं एक विचार हूँ
    अब तुम पर है- मुझे किस तरह लेते हो

    Waah Didi,
    neer- ksheer vivek ki pareeksha.

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  10. हरेक शख्स को खुद ही तय करना है कि उसे किसके साथ और क्या लेकर चलना है ...झूठ या सच ....

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  11. Bahut hi sunder ...wa bhawpoorn rachna ke liye badhai di.

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  12. बहुत अच्छी रचना रश्मि जी बधाई स्वीकारें...

    नीरज

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  13. sach hai mausi ji....sab hum pr hai...bahut gahri baat...aabhar

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  14. सत्य भी कसौटी पर परखा जाता है।

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  15. व्यक्तित्व पर गहरी और सुन्दर अभिव्यति.

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  16. दोहरी जिन्दगी जीना वैसे ही बहुत दुष्कर भी है .....

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  17. अंत अवश्यम्भावी है
    मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो

    kyaa baat hai Rasmi ji !!
    bahut sundar shabdon ka prayog aur bhavon ka ati sundar prakatikaran .

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  18. झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून dhoondhna vyarth है ।

    saty vachan ।

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  19. meri abhivyakti meri hai ..tumhe bhi puri azzadi hai tum mujhe apni tarah se dekho !!!

    liked each line .....

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  20. मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....

    बहुत सुंदर ...बेमिसाल पंक्तियाँ

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  21. बहुत सुन्दर दी...
    सत्य तो यही है कि सत्य हमेशा ही हमारे सम्मुख होता है, शायद उसकी तीक्ष्णता से घबरा कर हम ही उससे मुख मोड़ लेते हैं और हम असत्य के साथ चलते हुए सत्य को तलाशने का स्वांग करते रहते हैं....
    गंभीर चिंतन....
    सादर...

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  22. insaan apni sochon se hi kaise kaise saamne wale ka vazood mukarrar kar leta hai. aur vo insaan jise sochon me dhaala ja raha hai kabhi kabhi kitna galat sochon ke shikanze me jakada jata hai. gehen abhivyakti.

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  23. मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....
    यह सब तुम पर है
    सिर्फ तुम पर !
    वाह जबाब नही, बहुत सुंदर.

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  24. सुन्दर,सार्थक विचारणीय विचार है रश्मि जी.

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  25. विचार की भी व्यथा हो सकती है...जाकी रही भावना जैसी...

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  26. मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....
    यह सब तुम पर है
    सिर्फ तुम पर !

    बिल्कुल सही कहा है ..हर बात को हर कोई अलग ही ढंग से लेता है अपनी सोच के अनुसार ... अच्छी प्रस्तुति

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  27. सच्‍चे विचारवान लोग सत्‍य के साथ ही होते हैं। हम भी हैं।

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  28. अब तुम पर है- मुझे किस तरह लेते हो
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....
    यह सब तुम पर है

    badi sundar rachna...

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  29. मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....
    यह सब तुम पर है
    सिर्फ तुम पर !

    सत्य की रह कठिन सही साथ चल तो सही ...
    बेहतरीन !

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  30. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .
    गहरी बात.

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  31. मैं एक विचार हूँ
    अब तुम पर है- मुझे किस तरह लेते हो
    aapko to har koi achchayee ke liye hi lega........main bhi.

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  32. अपने में गहरा अर्थ लिए रचना आईना दिखाती हुई ...

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  33. गहरे विचारों वाली भावपूरण अभिव्यक्ति ...

    उत्तर देंहटाएं
  34. bahut sahee kaha har cheez hame waisi hi dikhai deti hai jaisi hum use dekhna chahte hain.....

    ye baat har drishtkon me laagu hoti hai....ise banaate bhi hum hain bigaadte bhi hum hain....

    milta julta kisi ne kaha bhi tha-sunderta dekhne wale ki aankho me hoti hai....

    behatareen abhivyakti.....jeene ka falsafaa sikhaati hui.....

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  35. जाकी रही भावना जैसी ..........
    शुभकामनायें आपको !

    उत्तर देंहटाएं
  36. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है कल ..शनिवार(२-०७-११)को नयी-पुराणी हलचल पर ..!!आयें और ..अपने विचारों से अवगत कराएं ...!!

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  37. मैं एक विचार हूं..

    बहुत सुंदर, कभी कभी ही ऐसी रचनाएं पढने को मिलती हैं।
    बहुत सुंदर

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  38. पूर्वाग्रह विचारों का शत्रु है । तटस्थ हुए बिना विचारों को हम देख ही नहीं पाते । बहुत अच्छी रचना

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  39. मैं एक विचार हूँ
    अब तुम पर है- मुझे किस तरह लेते हो
    मैं सत्य हूँ निर्बाधित विचारों का
    अब तुम पर है - मुझे किस तरह लेते हो


    बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए बधाई।

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  40. मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....
    यह सब तुम पर है
    सिर्फ तुम पर !
    यथार्थपरक रचना, किस बात को कौन कैसे लेता है...उत्तम प्रस्तुति, बधाई.

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  41. सत्य का सत्य....बधाइयाँ सुंदर भाव और बढ़िया लेखन के लिए.

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  42. मेरे संग चलो सुकून से
    या झूठ की असंतुलित मरीचिका में
    सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....
    यह सब तुम पर है
    सिर्फ तुम पर !
    .....सच ही है झूठ की असंतुलित मरीचिका में भटकते को सही राह उस समय कहाँ सूझ पाती हैं... बहुत गहन चिन्तन भरी प्रसूति के लिए आभार

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  43. सत्य का सुकून ढूंढते रहो ....
    यह सब तुम पर है
    सिर्फ तुम पर !

    बिल्कुल सही कहा है .... अच्छी प्रस्तुति

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  44. सच है विचार में से क्या लेना है ... ये अपने आप पर निर्भर करता है ...

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  45. यह सब तुम पर है
    सिर्फ तुम पर !

    sach kaha didi
    ye hum par hai ki hum kisi cheez ko kaise lete hain

    उत्तर देंहटाएं
  46. यह सब तुम पर है
    सिर्फ तुम पर !

    sach kaha didi
    ye hum par hai ki hum kisi cheez ko kaise lete hain

    उत्तर देंहटाएं

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