09 नवंबर, 2011

किताबों वाला प्यार



किताबों के सफ़र में मिले थे
लैला मजनू, शीरी फरहाद , हीर रांझा , सोहणी महिवाल
एडवर्ड सिम्पसन , अमृता इमरोज़ ....
.......
इंतज़ार , ख्याल, मनुहार ....
सब किताबी
जीवन में उतर गए थे !
सपने जो जागती आँखों में उतरते थे
माशाल्लाह - यथार्थ से परे थे !
आँखों को तिरछे घुमा
आईने में सलीम को बैठा
पूछती थी -
'हुजुर एक न एक दिन ये बात आएगी
कि तख्तो ताज भली है कि एक कनीज भली ?'
पानी में कंकड़ डालने से ज्यों पानी हिलकर स्थिर हो
उसी तरह आईने में सलीम को हटा एडवर्ड की छवि कहती
'मैं तख्तो ताज को ठुकरा के तुझको ले लूँगा ...'
और फिर आँखें
प्यार के समंदर से लबालब हो उठतीं
होठों पर एक ही पंक्ति होती -
'इंतज़ार और अभी और अभी और अभी ...'
....
जब जरा सा लगा कि प्यार है
झटके से हाथ झटक कटु शब्द गूंजे -
' ज़िन्दगी कोई सिनेमा नहीं
न किताब के दिलचस्प पन्ने हैं
रोटी दाल के भाव के आगे
ये सब चोचले हैं '.......
टप्प से आंसू की एक बूंद गिरी
' न हन्यते ' का मिर्चा मेरे ख्यालों से जाए तो कैसे !
दिल ने बहस किया दिमाग से -
' अगर इन ख्यालों में सच्चाई नहीं
तो ये सारे पात्र आए कहाँ से ? '
........
किसी भी किताब का कोई एक पन्ना मिल जाए
-की धुन में
रास्ते अकेले रहे !
........
पन्नों से निकलकर मिली थी इमरोज़ से
- ओह !
ऐसा ही तो चाहा था मैंने
मेरी तस्वीरों से
मेरी हँसी से
मेरे एहसासों से
कोई अपने कमरे की दीवारों को
चाहतों के रंग से भर दे ...!
बिना संगीत के मैंने वहाँ मौन सरगम सुने
पायल की रुनझुन सुनी
खाली कप से एहसासों का उठता धुंआ देखा
अमृता ना होकर भी
हर सू दिखी
अतीत का वर्तमान ...
प्यार के किताबी पन्नों सा फडफडाता मिला
...
मैं फिर सोचने लगी ...
कहीं तो होगा कोई पन्ना प्यार का
जिसमें उसके साथ मेरा भी नाम होगा
दुनिया पढेगी
और कोई लड़की एक ख्वाब देखेगी
मेरी तरह -
किताबी प्यार का !!!

....

42 टिप्‍पणियां:

  1. यह भाव कभी नहीं मरते, रह रह कर प्रकट होते हैं।

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  2. कोई लड़की एक ख्वाब देखेगी
    मेरी तरह -
    किताबी प्यार का !!!

    वाह ...बहुत खूब कहा आपने ... इन अहसासों से तो आज तक कोई मुक्‍त नहीं हो सका ...यक़ीनन आगे भी नहीं होगा .।

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  3. कहीं तो कोई पन्ना होगा ..सारी सोच सिमट आई है इन पंक्तियों में .. मन को छूती सुन्दर रचना

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  4. किताबी प्यार.. वाह! क्या कहने.

    अनुपम प्रस्तुति,मन को छूती.

    आभार.

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  5. जब जरा सा लगा कि प्यार है
    झटके से हाथ झटक कटु शब्द गूंजे -
    ' ज़िन्दगी कोई सिनेमा नहीं
    न किताब के दिलचस्प पन्ने हैं
    रोटी दाल के भाव के आगे
    ये सब चोचले हैं '.......
    टप्प से आंसू की एक बूंद गिरी


    wahhhhhh kya baat hai
    kalpana se haqiqat ke dharatal par aana kaisa lagta hai .

    exceelent creation

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  6. anupam.....avarnniy.....kya lekhni hai,kya bhaw hain......ekdam nirala andaz....

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  7. किताबी प्यार का ख्वाब देखती तो हर लडकी है मगर शायद ही होगी कोई खुशनसीब जिसे मिला होगा…………भावनाओ को खूबसूरती से उकेरा है।

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  8. बहुत सुंदर अनुपम पोस्ट..किताबों वाला प्यार..
    खूबशूरत रचना...

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  9. इस कविता का शीर्षक ही इतना खूबसूरत और अर्थ समेटे हुए है कि कविता पढ़े बिना नहीं रह सकता... सुन्दर कविता...

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  10. मन के भावों की बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति..

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  11. वंदना जी की बात से पूरी तरह सहमत हूँ किताबी प्यार का सपना देखती तो हर लड़की है। लगभग सभी के एहसास भी वही होते हैं, जिन्हें आपने बड़ी ही खूबसूरती से आज शब्दों में उतारा है। मगर बहुत कम ही लोग होते हैं जिन्हें किताबी प्यार हकीकत में भी मिल जाता है। किताबी प्यार के खूबसूरत एहसासों से सुसजित दिल को छु लेने वाली बेहतरीन अभिव्यक्ति ......आभार

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  12. किस्से हैं तो कुछ तो सच भी होगा. यही एहसास जिंदगी देते हैं.

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  13. किताबी प्यार का अपना एक अलग अनुभव एक अलग सा अहसास भी है..सुन्दर प्रस्तुति .

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  14. रश्मि जी इस खूबसूरत और भावपूर्ण रचना के लिए बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  15. किताबी प्यार के सच होने की दास्ताँ पढ़ी तो बहुत ...
    अमृता -इमरोज में साकार भी देखी ,
    जब देखा अमृता की यादों को धूल धूसरित होते
    तो खयाल फिर से वह आया ...
    क्या यह अफसाना भी किताबी था !!!
    यकीन तो है उनकी रूहों पर ,
    मगर जीवन में बहुत कुछ कल्पनाओं से परे भी घटता है !!

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  16. यथार्थ के धरातल पर ही जन्मते हैं ये किस्से और किताबों के हो जाते हैं...!
    कविता के भाव सार्वभौम सच्चाई को व्यक्त करने में सफल है!

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  17. ऐसा ही तो चाहा था मैंने
    मेरी तस्वीरों से
    मेरी हँसी से
    मेरे एहसासों से
    कोई अपने कमरे की दीवारों को
    चाहतों के रंग से भर दे ...!

    bahut sunder ...komal ehsaas...man ko chhoo gaye ...

    उत्तर देंहटाएं
  18. दिल ने बहस किया दिमाग से -
    ' अगर इन ख्यालों में सच्चाई नहीं
    तो ये सारे पात्र आए कहाँ से ? '
    सच्चे हैं ये ख़यालात...खूबसूरत भावनाएं, एक अलग सा अहसास कराती हुई रचना...

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  19. Pyar me har ladki Amrita ban jati hai. Par jane kyun har Amrita ko Imroz nai milta..

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  20. और कोई लड़की एक ख्वाब देखेगी
    मेरी तरह -
    किताबी प्यार का !!!
    अत्यंत अर्थपूर्ण व भावपूर्ण रचना

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  21. har khwaab ki chahat yahi
    ki
    use dekh ke koi us jaisa hi banna chahe...

    thodi komal, thodi masoom, thodi shararat, thoda gussa, thoda gam...
    par fir se ek khwaab...

    bas yahi to hai...

    haan...
    ab wo khwaab meri aankho mei hi hai... jab bhi man ho, waha aa kar dekh lena...
    waise hi saja rakha hai...

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  22. oooooh.... !

    dil chhu liya apki bhaavnaaon ne...
    ab sapne dekhna to in ankhiyo ka adhikar hai.. ya sirf yahi ekmaatr cheez hai, jo ve bina parwaah ke kar sakti hai..

    :)

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  23. jab tak pyar na ho to ye bate rumani lagti hain....bahut pyari lagti hain...aaj kalyug me to pyar bhi shadi k laddu ki tarah ho gaya hi jise jo na khaye vo bhi pachhtaye..jo khaye vo bhi.

    sunder abhivyakti.

    lagta hai kuchh meri sadaao se narazgi ho gayi hai jo duriyan kayam hain ?

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  24. मैं फिर सोचने लगी ...
    कहीं तो होगा कोई पन्ना प्यार का
    जिसमें उसके साथ मेरा भी नाम होगा
    दुनिया पढेगी
    और कोई लड़की एक ख्वाब देखेगी
    मेरी तरह -
    किताबी प्यार का !

    ye hasrat sab kee pooree kahaan hotee
    sundar rachnaa sadaa kee tarah

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  25. प्रेम की गहराई को बहुत ही गहराई से प्रस्तुत करती रचना.....

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  26. जी, क्या कहने
    बहुत सुंदर रचना

    ऐसा ही तो चाहा था मैंने
    मेरी तस्वीरों से
    मेरी हँसी से
    मेरे एहसासों से
    कोई अपने कमरे की दीवारों को
    चाहतों के रंग से भर दे ...

    उत्तर देंहटाएं
  27. behad hi khubsurat rachna.. aisi talash to har kisi ko hoti hain... har koi yahi pyaar dhund raha hain...

    behad accha laga padhna

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  28. किसी भी किताब का कोई पन्ना मिल जाय की धुन मैं ..रास्ते अकेले है ..सच कहा साथ रहते हुए भी अकेले है

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  29. मैं फिर सोचने लगी ...
    कहीं तो होगा कोई पन्ना प्यार का
    जिसमें उसके साथ मेरा भी नाम होगा
    दुनिया पढेगी

    duniya padhegi to fir wah kitaab ho jayegi.........ek aur chakr banaa jayegi.......


    sunder rachna...........

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  30. प्यार में हम ही पगे होते हैं जो हर जगह हमें दिखता है.या हम खोजते रहते हैं.

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  31. किताबी पन्नो सा प्यार काश सच हो पाता

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अक्षम्य अपराध

उसने मुझे गाली दी .... क्यों? उसने मुझे थप्पड़ मारा ... क्यों ? उसने मुझे खाने नहीं दिया ... क्यों ? उसने उसने उसने क्यों क्यों ...