18 नवंबर, 2011

प्यार मर जाता है



जाने कैसे ...
किस आधार पर
सब कहते हैं - ' प्यार कभी नहीं मरता '
... मरता है प्यार
यदि वह इकतरफा हो
मरता है प्यार
यदि उपेक्षा के दंश गहरे हों !

अहम् और अस्तित्व में फर्क होता है ...
प्यार तो यूँ भी सरस्वती की तरह
विलीन होना जानता है
पर उसके अस्तित्व को मिटाना ?
क्या सरस्वती के बगैर त्रिवेणी का अस्तित्व होगा ?
प्यार पहचान देता है
ना देखकर भी उसे देखा जा सकता है
पर देखकर जब कोई ना पहचाने
फिर प्यार ..... मानो न मानो
मर जाता है !

हाँ मृत्यु से पहले
प्यार मोह की बैसाखी लेता है
खींचता है अपना सर्वांग
लेकिन ...
जब वह खुद को खींचने में असमर्थ होता है
और उसके लड़खड़ाते अस्तित्व के आगे
किसी की मजबूत हथेली नहीं होती
तो - प्यार मौन हो जाता है !

अवरुद्ध साँसों के बीच
अतीत की लकड़ियाँ इकट्ठी करता है
भूले से भी लकड़ियों में गीलापन न रह जाए
प्राप्त उपेक्षा के घी से उसे सराबोर करता है
फिर आँखों की माचिस से
एक बूंद की तीली ले
उसे प्रोज्ज्वलित करता है
उम्मीदों का तर्पण कर
खुद को खुद ही मुक्ति देता है ....

अमरत्व उस प्यार में है
जहाँ दोनों तरफ अमृत हो
एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो ....
तो ,
.... अब सोचकर देखो ,
प्यार मर जाता है न ?

49 टिप्‍पणियां:

  1. मरता नहीं तो भी सूख जाता है , यदि सूख जाता है झील पर बर्फ की परत की मानिंद ...नमी का एक हल्का सा झोंका पिघला देता है ! पतझड़ में गिरे पातों की तरह सूखा तो एक- एक रेशा बिखर जाता है !

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  2. sateeek ......shaayad nahi marta ....bas vakt ki silvato me gum ho jata hai ya haar jaata ....or agar mar bhi jaata hai ..to kuch na kuch to sesh rah jaata esa kuch jo sabd me baadhya nahi hai ....

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  3. अमरत्व उस प्यार में है
    जहाँ दोनों तरफ अम्रत हो,..सुंदर पोस्ट ...

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  4. अमरत्व उस प्यार में है
    जहाँ दोनों तरफ अमृत हो
    एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो ....
    तो ,
    .... अब सोचकर देखो ,
    प्यार मर जाता है न ?

    behad sundar , aanad aa gaya padh ke

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  5. दूसरी तरफ अगर विष है तो भी प्यार रहता है और अमृत बन कर ही रहता है...क्योंकि प्यार कुछ चाहने या प्राप्त करने का नाम नहीं...प्यार तो समर्पण है..त्याग है..प्यार प्रतिफल नहीं चाहता...
    खूबसूरत कविता ....आभार.

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  6. निःसंदेह अमृत अमृत ही रहता है, पर विष के लिए नहीं ...क्योंकि विष भी हर हाल में विष ही रहता है...

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  7. अमृत और विष कभी नहीं मिल सकते ... लेकिन कभी कभी अमृत कि अधिकता अमृत को ही विष बना देती है ..और प्यार मर जाता है ..

    विचार करने योग्य प्रस्तुति

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  8. किसी की मजबूत हथेली नहीं होती
    तो - प्यार मौन हो जाता है !
    बिल्‍कुल सच ...

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  9. मरता है प्यार - यदि वह इकतरफा हो
    मरता है प्यार - यदि उपेक्षा के दंश गहरे हों !

    KAhte hai Expectation nahi rakhni chahiye, per pyaar ke badle pyaar ki apekhsha kya galat hai ?

    ektarfa koi bhi bhaav jyaada din tak nahi rahta..! Ilu Maa..!

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  10. अमरत्व उस प्यार में है
    जहाँ दोनों तरफ अमृत हो
    एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो ....
    तो ,
    .... अब सोचकर देखो ,
    प्यार मर जाता है न ?

    गहरा दृष्टिकोण ..... बहुत उम्दा रचना

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  11. kahtain hain pyaar mein doobne ke liye apne astitva ko mitana padta hai. moh to avashyambhavi hai...upeksha aur pyar mein sur aur asur ka rishta hai....bahut achhi rachna hai rashmiji....likhti rahiye.........

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  12. जो मर जाता हो वह प्यार ही नहीं...प्रेम तो खुदा है और खुदा कभी मर नहीं सकता...

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  13. आदरणीय रश्मि जी,
    क्षण भंगुर ये जीवन सारा,प्यार भी मरता न कोई सहारा...
    सुंदर रचना।

    सादर
    इंदु

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  14. प्यार तो यूँ भी सरस्वती की तरह
    विलीन होना जानता है
    पर उसके अस्तित्व को मिटाना ?
    क्या सरस्वती के बगैर त्रिवेणी का अस्तित्व होगा ?
    wah.......nat-mastak hoon aapki lekhni ke samne.

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  15. अमरत्व उस प्यार में है
    जहाँ दोनों तरफ अमृत हो
    एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो

    मुझे इन पंक्तियों मे वास्तविकता दिखती है।

    सादर

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  16. हाँ मृत्यु से पहले
    प्यार मोह की बैसाखी लेता है
    खींचता है अपना सर्वांग
    लेकिन ...
    जब वह खुद को खींचने में असमर्थ होता है
    और उसके लड़खड़ाते अस्तित्व के आगे
    किसी की मजबूत हथेली नहीं होती
    तो - प्यार मौन हो जाता है !

    दीदी एक एक शब्द सच है ....

    अमरत्व उस प्यार में है
    जहाँ दोनों तरफ अमृत हो
    एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो ....
    तो ,
    .... अब सोचकर देखो ,
    प्यार मर जाता है न ?

    एकांगी प्यार हो ही नहीं सकता और अगर हुआ भी कितने दिन ??

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  17. जो मर जाये वह प्यार हो ही नहीं सकता... फिर अमृत क्या और विष क्या... अपना-अपना दृष्टिकोण है... सुन्दर रचना

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  18. सरस्वती के बिना त्रिवेणी कहाँ!

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  19. अप्रतिम रचना...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  20. प्यार पाने की इच्छा रखने वाले
    स्वार्थी कहलाते हैं प्यार तो देना
    जानता है पाना नहीं ..
    चाहे उसे अमृत मिले या विष !
    लेकिन ये हर प्यार के वश की बात नहीं है !

    बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण रचना !
    आभार आपका ..
    मेरी नई पोस्ट " बेबसी की आँधी " के लिए पधारे आपका हार्दिक स्वागत है !

    उत्तर देंहटाएं
  21. प्यार पाने की इच्छा रखने वाले
    स्वार्थी कहलाते हैं प्यार तो देना
    जानता है पाना नहीं ..
    चाहे उसे अमृत मिले या विष !
    लेकिन ये हर प्यार के वश की बात नहीं है !

    बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण रचना !
    आभार आपका ..
    मेरी नई पोस्ट " बेबसी की आँधी " के लिए पधारे आपका हार्दिक स्वागत है !

    उत्तर देंहटाएं
  22. अवरुद्ध साँसों के बीच
    अतीत की लकड़ियाँ इकट्ठी करता है
    भूले से भी लकड़ियों में गीलापन न रह जाए
    प्राप्त उपेक्षा के घी से उसे सराबोर करता है

    waah kya shabdon ka vinyaas hai aur behtareen chayawaadi kavita hetu badhai

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  23. हमेशा की तरह इस बार भी बहुत ही गहरे विचारों वाली विचार करने पर मजबूर करती रचना... लेकिन तभी में यह कहूँगी की प्यारर घायाल ज़रूर होता है कभी-कभी इतना की विश्वास ही उठने लगता है प्यार पर से मगर प्यार कभी मारता नहीं, वो टीसबन कर ही सही मगर दिल में रहता ज़रूर है और सदा रहेगा जैसा की आपने खुद ही लिखा है।
    प्यार पहचान देता है
    ना देखकर भी उसे देखा जा सकता है
    पर देखकर जब कोई ना पहचाने
    फिर प्यार ..... मानो न मानो
    मर जाता है !
    प्यार भगवान की तरह होता है जो न देखने पर भी दिखता है जैसे भगवान मानो तो भगवान है न मानो तो पत्थर...मेरे विचार से प्यार का दूसरा रूप शायद आस्था और विश्वास पर कायम भक्ति की तरह है।

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  24. Rashmi ji..

    Log hain marte rahe, par pyaar hai marta nahi..
    Koi vish bhi pyaar ko, nashwar kabhi karta nahi..
    Jisne bhi jeekar ke dekha, pyaar ka ek pal kahin..
    Ho upekshit wo bhale, par pyaar se darta nahin..

    Yun daleelen log kitne, dete rahte hain, magar..
    Par kisi ne kya hai jaana, pyaar ka hai kya asar..
    Log veeranon min bhi bas, pyaar ke boote jiye..
    Wo kanteeli raah par bhi, badh chale hokar nidar..

    Pyaar marta nahi hai..maar diya jaata hai..

    Deepak..

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  25. एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो ....
    तो ,
    ...NISANDEH प्यार मर जाता है , JANM LENE SE PAHLE HI .

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  26. अमरत्व उस प्यार में है
    जहाँ दोनों तरफ अमृत हो
    एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो ...
    वाह ...लाजबाब पंक्तियाँ

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  27. nahi pyar kabhi nahi marta..ek tarfa ho to bhi vo jinda to raheeta hai na..aur bahut achchi tarah jinda raheta hai..ha ektarfa prem maun jarur ho jata hai vo bat manti hu...

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  28. प्यार मरता नहीं..कहीं दुबक जाता है,कभी-कभी .प्यार डायलाग ही हो..तभी अमर होता है....मोनोलोग ,प्यार नहीं होता.

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  29. शायद ठीक ही कहा आपने.विचारणीय कविता.

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  30. अमरत्व उस प्यार में है
    जहाँ दोनों तरफ अमृत हो
    एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो ....
    तो ,
    .... अब सोचकर देखो ,
    प्यार मर जाता है न ?

    ....एक गहन विचारणीय प्रस्तुति..एक सच जिस से आँखें नहीं मूँद सकते.बहुत उत्कृष्ट..

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  31. अमृत विष के द्वन्द्व से बाहर ही मुक्ति है।

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  32. दीदी ...
    शायद थोड़ी और ऊंचाई से देखना पढ़ना समझना पड़ेगा मुझे ...
    विचारघारा और हृदय-धारा दोनो मान नहीं रहीं (अभी)
    .. सादर

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  33. समझाने के लिए एक कहानी (उदाहरण कई हैं )- एक लड़की ने प्यार किया , सबसे बगावत कर शादी की ... एक बेटा हुआ , पति ने छोड़ दिया ... लड़की अब समाज के प्रश्नों से गुजर रही है , बेटे को खुश रखने का प्रयास कर रही है ...यहाँ दर्द तो सही है,पर क्या यह प्यार प्यार रह जायेगा - जहाँ बेटे की आँखों में सन्नाटा हो ???

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  34. bahut sunder rachna
    pyar marta hai kai baar waqt ki khai sabndho me darar lati hai aur dheere dheere pyar us khai me girke dafn ho jata hai

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  35. खुद ही मुक्ति देता है...रोक लिया इस पंक्ति ने.

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  36. जाने कैसे ...
    किस आधार पर
    सब कहते हैं - ' प्यार कभी नहीं मरता '
    ... मरता है प्यार
    यदि वह इकतरफा हो
    मरता है प्यार
    यदि उपेक्षा के दंश गहरे हों !
    bhut hi satik kavita haei...

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  37. बहुत सुंदर।
    आपका चिंतन सामाजिक धारणाओं से बिल्कुल हटकर है। आमतौर पर तो हम सब यही मानते हैं कि प्यार कभी मरता नहीं.. किसी ना किसी तरह वो हमारे साथ जीता है... पर आपको पढने के बाद तस्वीर का दूसरा सच भी सामने आया। भावपूर्ण रचना

    जाने कैसे ...
    किस आधार पर
    सब कहते हैं - ' प्यार कभी नहीं मरता '
    ... मरता है प्यार
    यदि वह इकतरफा हो

    उत्तर देंहटाएं
  38. Mujhe nahi pata pyaar marta hai ya nahi marta.... Han ye jarur sach hai ki

    जब वह खुद को खींचने में असमर्थ होता है
    और उसके लड़खड़ाते अस्तित्व के आगे
    किसी की मजबूत हथेली नहीं होती
    तो - प्यार मौन हो जाता है !


    Life is Just a Life
    My Clicks
    .

    उत्तर देंहटाएं
  39. बहुत सुंदर प्रस्तुति. आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  40. अच्छा चिंतन/मीमांशा है दी...
    डूब कर रची है यह रचना...
    सादर...

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  41. अमरत्व उस प्यार में है
    जहाँ दोनों तरफ अमृत हो
    एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो ....
    तो ,
    .... अब सोचकर देखो ,
    प्यार मर जाता है न ?

    बिल्कुल मर जाता है…………अमृत मे वो ताकत कहाँ जो विष को भी अमर कर दे…………कम से कम आज तो ऐसा कहीं नही दिखता…………गहरी रचना।

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  42. आपकी रचना सम्वेदना के धरातल पर अनूठा सृजन है, शब्द-चयन और भाव-प्रवणता एक नई ही सोच को जन्म देती है.
    मेरे विचार में प्यार एक शैतान पौधा है,जहाँ जागता है वहाँ मरता ही नहीं.फिर जहाँ जागा ही न हो वहाँ मर कैसे सकता है ?

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  43. अवरुद्ध साँसों के बीच
    अतीत की लकड़ियाँ इकट्ठी करता है
    भूले से भी लकड़ियों में गीलापन न रह जाए
    प्राप्त उपेक्षा के घी से उसे सराबोर करता है
    फिर आँखों की माचिस से
    एक बूंद की तीली ले
    उसे प्रोज्ज्वलित करता है
    उम्मीदों का तर्पण कर
    खुद को खुद ही मुक्ति देता है ....

    बहत सही लिखा है ये प्रश्न मेरे मन मैं भी कई बार आया ..आज आपने भी लिख दिया

    मुझे भी ऐसा ही लगता है ..यदि मरता नहीं है तो कहाँ चला जाता है ?

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  44. सच में जब प्यार एक तरफा हो तो वो मरता हि है.
    एक तर्फे प्यार कि सच्चाई बया करती आपकी यह रचना अति
    उत्तम है...
    बहूत हि भावपूर्ण और उत्तम प्रस्तुती है....

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  45. अमरत्व उस प्यार में है
    जहाँ दोनों तरफ अमृत हो
    एक तरफ अमृत और एक तरफ विष हो ....
    तो ,
    .... अब सोचकर देखो ,
    प्यार मर जाता है न ?

    निःशब्द...

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अक्षम्य अपराध

उसने मुझे गाली दी .... क्यों? उसने मुझे थप्पड़ मारा ... क्यों ? उसने मुझे खाने नहीं दिया ... क्यों ? उसने उसने उसने क्यों क्यों ...