02 नवंबर, 2011

असत्यमेव जयते



सच हमेशा झूठ के कटघरे में रहता है !
सच का वकील बहुत कमज़ोर होता है
उसका कोई नाम नहीं होता
दम्मे के मरीज़ की तरह
वह हक़ हक़ दलीलें देता है
और फिर रिक्शे से घर लौट जाता है
मद्धम रौशनी में
क़ानूनी किताबें पलटता है ...
और दुबले पतले डरे सहमे गवाहों से
कुछ बातें कर सो जाता है ...
ताउम्र कैद
चेहरे पर बेनामी झुर्रियां
या फिर तारीख से पहले फांसी ...
.............
सही वकील तो झूठ के साथ ऐप्पल दिखता है
चेहरे पर रुआब
लम्बी सी गाड़ी
तिरछी निगाहें बताती हैं
' असत्यमेव जयते '
अनजाने चश्मदीद गवाह की भी अपनी
आन बान शान होती है
गुनहगार बेफिक्री की नींद सोता है
कानून की अंधी देवी के तराजू का पलड़ा
नोटों से झुका रहता है
सच ठन ठन गोपाल बना
कुल्हड़ की चाय संग खींसे निपोरे रहता है
जय जयकार उसी की होती है
हस्ती उसीकी होती है
जो झूठ को सच बनाता है
और सच का तर्पण डंके की चोट पर करता है
यह कहते हुए ...
'असत्यमेव जयते '

46 टिप्‍पणियां:

  1. आजकल सच बोलने वाले को तो कष्ट ही कष्ट है.
    अच्छी कविता.

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  2. जीवन असत्य के चौराहों से गुजर रहा है, कोई सच की राह दिखे।

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  3. आज के समय का सच.....असत्यमेव जयते !!

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  4. सच हमेशा झूठ के कटघरे में रहता है !
    सच का वकील बहुत कमज़ोर होता है
    उसका कोई नाम नहीं होता

    पूरी कविता आज की कानून व्यवस्था पर सार्थक और तीखा कटाक्ष करती है। शुरू की पंक्तियाँ अपने आप मे सम्पूर्ण लगती हैं।

    सादर

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  5. vakeelon ki achchi bend bajaai aapne...bilkul sahi yahi hota hai.sach to bechaara intjaar karte karte hi dam tod deta hai.bahut sateek rachna.

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  6. आज सच ही झूठ का बोलबाला है .. सच कहीं दुबका पड़ा रहता है .. सही खाका खींचती अच्छी प्रस्तुति

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  7. असत्‍यमेव जयते ..तभी तक जब तक सच सामने नहीं आता ...।

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  8. लगातार असत्य को जीतते हुए देख मन कई बार इसी अवस्था से गुजरता है , और धीरे -धीरे हम असत्य पर ही यकीन करने लग जाते हैं , फिर भी विश्वास बनाये रखना चाहिए कि अंतिम विजय सत्य की ही होगी !

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  9. Wah..kya baat hai !!!

    aapki panktiyan padhte - padhte mujhe meri kavita "Jhootha Sachh" aur uspe aapki pratikriya jisme vakil ka jikra tha yaad aa raha tha...

    Bhaav dono hi rachnaon ke kafi milte lagey...

    www.poeticprakash.com

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  10. जय जयकार उसी की होती है
    हस्ती उसी की होती है
    जो झूठ को सच बनाता है
    बिलकुल सही कहा है
    बढ़िया रचना !

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  11. बडा गहन विश्लेषण किया है।

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  12. सच की राह सूनी पडी़ है
    झूठ की राह में भीड़ बडी़ है.... सच कहीं दुबका पड़ा है..अच्छी प्रस्तुति

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  13. 'असत्यमेव जयते '
    aaj ke samaj ka bebak chitr khich kar rakh din.....kabile taareef....

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  14. जय जयकार उसी की होती है
    हस्ती उसीकी होती है
    जो झूठ को सच बनाता है
    और सच का तर्पण डंके की चोट पर करता है
    यह कहते हुए ...
    'असत्यमेव जयते

    yatharthparak, sashakt vyang rachna...

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  15. बहुत ही तीखे तेवर की दमदार कविता बधाई

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  16. आजकल सत्य भी असत्य की आड़ में ही है.

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  17. आज झूठ का ही बोलबाला है .. सच कमजोर हो गया है .. सही कह रही है आपकी रचना...अच्छी प्रस्तुति

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  18. रश्मि जी दाद देनी पड़ेगी ....आपके खजाने से कितने ही नगीने निकलतें है रोज ख्यालों के और आस पास की घटनाओं को परखने की छमता ...

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  19. सच हमेशा झूठ के कटघरे में रहता है !
    सच का वकील बहुत कमज़ोर होता है
    गुनहगार बेफिक्री की नींद सोता है
    कानून की अंधी देवी के तराजू का पलड़ा
    नोटों से झुका रहता है
    अंत में सत्य की जीत होती है... !
    अतीत के ग्रंथो की बात लगती है.... !!

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  20. अंत में सत्य की ही जीत होती है,अंतःमन से लिखी सुंदर रचना...

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  21. practically 100% true............

    fir bhi kaali patti ka koi samadhaan nahi hai.....kaanoon ki aankho par patti ka matlab hai uske liye sab barabar hai jaisa ki hamare samwidhaan ka bhi darshan raha hai............

    lekin durbhagyawash iska kuchh aur matlab nikaala jaata hai...........

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  22. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 3 - 11 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज ...

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  23. असत्य की धुंध कितना ही भ्रम पैदा कर दे किंतु सच यही है कि सत्य मेव जयते.

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  24. एक झूठ जितनी ही बार दोहराया उतना ही सच का चोला पहनने लगता है आजकल.
    बेहतरीन प्रस्तुति

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  25. एक कष्टदायक सच्चाई बयाँ कर दी आपने ....

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  26. माया की धुंध में सत्य और असत्य का निर्णय करना कठिन होता है.वैसे सत्य तो दमकते सूर्य के समान है जो किसी धुंध अथवा बादलों से ढका नही जा सकता.जैसे कि मृत्यु एक अटल सत्य है.फिर क्या राजा या रंक,क्या वकील या मुवक्किल,क्या दुखी या सुखी.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग को लगता है आपने भुला दिया है रश्मि जी.क्या कोई गल्ती हुई है मुझसे?

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  27. वह हक़ हक़ दलीलें देता है
    और फिर रिक्शे से घर लौट जाता है
    मद्धम रौशनी में
    क़ानूनी किताबें पलटता है ...
    और दुबले पतले डरे सहमे गवाहों से
    कुछ बातें कर सो जाता है ...
    ताउम्र कैद
    चेहरे पर बेनामी झुर्रियां
    या फिर तारीख से पहले फांसी ...

    दीदी ऐसा क्यों होता है ..जबकि समाज और मानव तो अपने आपको विकसित कहते नहीं थकता ...और ऐसा कब तक होगा दीदी !

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  28. बिल्कुल सहमत

    सच का वकील बहुत कमज़ोर होता है
    उसका कोई नाम नहीं होता

    असत्यमेव जयते

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  29. असत्य को खुद को साबित करने के लिये सत्य के वस्त्र पहनने पड़ते हैं...अंत में सत्य ही जीतता है इस का भरोसा रखना ही होगा हमें..

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  30. सच का वकील बहुत कमज़ोर होता है

    पता नहीं क्यूँ? पर सच है...
    अच्छी रचना दी...
    सादर बधाई...

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  31. तीखी टिपण्णी आज के समय पर ... बेहतरीन ...

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  32. aaj ke jamane me sach kahan hai,maloom nahi
    jai hind jai bharat

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  33. एकदम सच कहा आपने सच का वकील बड़ा कमजोर होता है। आजकल के हालतों को देखते हुए एक साटीक नाम दिया है आपने आपनी एस रचना को असत्यमेव जयते!!!! बहुत खूब....

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  34. असत्‍य का अस्तित्‍व भी सत्‍य के बिना नहीं है।

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  35. rashmi di
    aaj ke samaaj ka aaina dikhata hua sach.
    har shbd apne aap ko sahi sabit kar rahein hain.
    sachchi baat! jhoothe ka bol-bala sachche ka munh kaala--aaj yhkahavat fit biathti hai.
    bahut hi sarthak prastuti
    sadar naman
    poonam

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  36. सब जगह मैच फिक्स है...हारने के भी पैसे मिलते हैं...तो भला सच का कौन साथ दे...

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  37. सच हमेशा झूठ के कटघरे में रहता है !
    सच का वकील बहुत कमज़ोर होता है....
    बहुत ही भाव पूर्ण प्रस्तुति ..वर्तमान सामाजिक
    परिवेश सत्य का हश्र ...बेहद ह्रदय स्पर्शी अभिव्यक्ति

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  38. झूठ का बोलबाला तो आजकल बढ़ ही गया है इसमें कोई दोमत नहीं है...
    सही मुद्दा पे प्रकाश डालती ये रचना ...
    आभार आपका ...

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  39. Bahut sahi kahti hain aap.. Bahut hi majboot rachna.. Aabhar....

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  40. सत्य को बहुत अच्छी तरह कलम बद्ध किया है आपने ।

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  41. आपकी किसी पोस्ट की हलचल है ...कल शनिवार (५-११-११)को नयी-पुरानी हलचल पर ......कृपया पधारें और अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें .....!!!धन्यवाद.

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  42. सच को शब्दों में पिरोने की फिर एक बार अदभुत प्रस्तुती.....

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  43. रश्मि जी बहुत बढ़िया लिखा है
    एकदम सच प्रस्तुति .....

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प्रभु

देनेवाले, तेरा दिया तुझे ही देकर सब बहुत खुश हैं ! सोने से तुम्हें सजाकर डालते हैं एक उड़ती दृष्टि अपने इर्दगिर्द और मैं तोते की...