09 जुलाई, 2012

तौबा तौबा ------ प्यार को प्यार ही रहने दो



अक्सर सुना है .... मेरे बेटे को फंसा लिया !!!
अरे कभी तो कहो - या कहने दो - बेटी को फंसा लिया !
बेटा न हुआ - जैसे चूहा !
और किसी की बेटी - चूहेदानी ...
!!!!!!!!!!!!
अरे रिश्ता बनाना ही है
बनना ही है
तो बिना कमर कसे बनाओ न
हिकारत के शब्द कहने ज़रूरी हैं क्या !
.....
पूरी ज़िन्दगी उन शब्दों के दलदल में डगमगाती है ...
हर बार नए सिरे से सर उठाती है
और बेवजह लानत मलामत कर
आंसू बहाती है .
प्यार होना था - हो गया
फिर कौन फंसाया
कौन फंसा की कैसी माया !
खामखाह प्यार करनेवालों के बीच
एक बीज जंग का क्यूँ ????????
खाते-पीते , उठते - बैठते तकरार
तुम्हारी माँ ने मेरी माँ को ऐसा कहा !
हाँ तो तुम्हारी माँ भी बोली थीं !
ऐसी बोली मेरी माँ की नहीं .......
तुम्हारे पापा , मेरे पापा
......
बाप रे बाप !!!
ऐसे में बिना फंसाए पूरी ज़िन्दगी फंस जाती है
और गीत बजता है -
क्या यही प्यार है !

और फिर कलह -
तुम तो रहने ही दो
ड्रामा बन्द करो
जो गीत मुझे बजाना चाहिए
वो तुम बजा रहे/रही !

तौबा तौबा ------ प्यार को प्यार ही रहने दो
चूहेदानी न बनाओ !

35 टिप्‍पणियां:

  1. ये प्यार क्या होता है जी ? क्या होता है प्यार ! :)

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  2. ये प्यार क्या होता है जी ? क्या होता है प्यार ! :)

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  3. :-)

    कोई समझे तब न.............
    सादर

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  4. प्यार में तकरार नहीं होती बल्कि जब प्यार पर अहम् हावी हो जाता है तो फिर ऐसी चीजें सामने आने लगती हें , नहीं तो प्यार एक दूसरे के प्रति सहृदय होने का नाम है.

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  5. बेटा न हुआ - जैसे चूहा !
    और किसी की बेटी - चूहेदानी ...
    करारा व्यंग्य...
    पर क्या करें....आज के दौर का सच तो यही है

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  6. प्यार को भी ताज़ी बयार मिलनी चाहिए...!

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  7. बहुत अच्छा हकीकत है ये ...
    एकदम परफेक्ट दृश्य खिंचा है आपने...
    बहुत बेहतरीन रचना....
    :-)

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  8. बेटा न हुआ - जैसे चूहा !
    और किसी की बेटी - चूहेदानी ...
    वाह-वाह क्या बात है .... :D
    ====================
    तुम्हारी माँ ने मेरी माँ को ऐसा कहा !
    हाँ तो तुम्हारी माँ भी बोली थीं !
    ऐसी बोली मेरी माँ की नहीं .......
    तुम्हारे पापा , मेरे पापा
    केवल love - marriage में ही नहीं ये बातें तो arrange - marriage में भी सुनाई दे जाता है ....

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  9. बाप रे बाप !!!
    ऐसे में बिना फंसाए पूरी ज़िन्दगी फंस जाती है
    और गीत बजता है -
    क्या यही प्यार है !

    ....आज के हालात का बहुत सटीक चित्रण....

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  10. सही है जब प्यार हो ही गया हो तो जंग का बीज क्यों बोना, बेहतर है प्यार को प्यार ही रहने देना...

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  11. प्यार को प्यार ही रहने दो इल्जाम न दो,,,,,,

    सटीक प्रस्तुति,,,,

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  12. बहुत अलग सी पोस्ट है यह.. संदेश अच्छा है.. उम्मीद है लोग सुन रहे हैं

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  13. बेटा न हुआ - जैसे चूहा !
    और किसी की बेटी - चूहेदानी ...
    :):):):):)
    बेटे को इतना बेवकूफ़ क्यों बनाया कि वह फँस गया,
    अब प्यारी सी चूहेदानी में फँस कर वह खुश है तो तकलीफ़ कैसी...किसी न किसी चूहेदानी में तो रहना ही है नः)

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  14. बड़े धोखे हैं इस राह में...अति सुन्दर ..

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  15. तौबा तौबा ...
    मगर कभी- कभी इन तकरारों में बेशुमार प्यार भी छिपा होता है , भीतर की सारी कटु भावनाएं निकल जाती है और फिर सब कुछ निर्मल :)

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  16. सच है, स्वीकार और समर्पण के बाद दोषारोपण कैसा..

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  17. कोई नाम न दो, जहां नाम दिया नहीं की सत्यानाश, फंसा लिया तो जैसे चुहेदानी न होकर शेरदानी हो.....लानत हो...
    दिल के करीब से गुजर गई..
    सादर

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  18. अरे रिश्ता बनाना ही है
    बनना ही है
    तो बिना कमर कसे बनाओ न
    हिकारत के शब्द कहने ज़रूरी हैं क्या !
    बिल्‍कुल सच कहा आपने ... सहज सरल शब्‍दों में हकी़कत बयां करती पोस्‍ट ... आभार

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  19. बाप रे बाप !!!
    ऐसे में बिना फंसाए पूरी ज़िन्दगी फंस जाती है
    और गीत बजता है -
    क्या यही प्यार है !


    लिखने का अंदाज़ भा गया :):)

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  20. कल 11/07/2012 को आपकी किसी एक पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' अहा ! क्‍या तो बारिश है !! ''

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  21. सही है फिर तो बजाए इस गाने के की" क्या यही प्यार है" यह गाना बजना चाहिए "ये प्यार-प्यार क्या इंकार यार क्या है ये जीत हर क्या है बता" ..... :)

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  22. प्यार तो प्यार होता है इसमें फंसाना या फंसना क्या ...एक अलग तरह का अहसास..खूब लिखा..रश्मि जी ..क्याबात है..

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  23. सही कहा है पर प्यार को प्यार तक कौन रहने देता है .. इलज़ाम लगाते रहते हैं ...

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  24. बहुत सटीक खाका खींचा है आपने :)

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  25. मुस्कराहट बिखेर दी आपकी रचना ने ........हाँ कुछ ऐसा ही तो होता है ...बहुत सही .....

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  26. बहुत अच्छा संदेश - प्यार को प्यार ही रहने दो !

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  27. सहजता और रोचकता से महत्त्वपूर्ण सन्देश देती रचना दी... :)))
    सादर बधाई.

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  28. अक्सर सुना है .... मेरे बेटे को फंसा लिया !!!
    अरे कभी तो कहो - या कहने दो - बेटी को फंसा लिया !
    बेटा न हुआ - जैसे चूहा !
    और किसी की बेटी - चूहेदानी ...
    !!!!!!!!!!!!


    haahhahahaah......ekdum mst!!!

    chuha fanse ya chuhiya, shuruaat koi na koi to karta hai....vaise dono "gunahgaar" hain... :) :) :)

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  29. pyaar karne se pahle hi adchane itni ki ..mujhe to lagta hai dar me koi pyaar kar bhi paayaa hai ya nahi is duniyaan me .nice

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प्रभु

देनेवाले, तेरा दिया तुझे ही देकर सब बहुत खुश हैं ! सोने से तुम्हें सजाकर डालते हैं एक उड़ती दृष्टि अपने इर्दगिर्द और मैं तोते की...