17 जुलाई, 2012

ख्वाब क्यूँ ?



पूछते हो - ख्वाब क्यूँ ?

ख्वाब ही तो संजीवनी हैं
जब भूख लगती है
और खाने को कुछ नहीं होता
तो ये ख्वाब रोटी बन जाते हैं
सुनाते हैं लोरियां परियों की
जो दे जाती हैं सुनहरी भोर कुछ कर दिखाने की !

ख्वाब आकाश को धरती पर ले आते हैं
चाँद से होती है गुफ्तगू
सितारे हथेलियों में छुप जाते हैं
देती हूँ आकाश को पानी
लेती हूँ आकाश से आशीष
पानी के एवज में एक मीठी नदी का
ख्वाब से ही तो नदी निकलती है
कह सकते हो इन ख़्वाबों को शिव की जटा
शिव का त्रिनेत्र
पार्वती का तप
राधा का समर्पण
कृष्ण की बांसुरी
सिद्धार्थ का निर्वाण ........ सब तुम्हारे हाथ में है
जो ये ख्वाब हैं !

ख्वाब ही शोध है
इतिहास है
इमारत से खंडहर
और खंडहर से इमारत है
बिना ख्वाब के तो चाय नहीं बनती
चिन्नी डालो
दूध डालो
पत्ती डालो
अदरक, इलायची , मसाले .....
एक चुटकी ख्वाब नहीं
तो चाय बड़ी फीकी होती है !

ख्वाब ही आजादी की निष्ठा देते हैं
इकबाल को कहते हैं -
' ज़रा नम हो तो यह मिट्टी बड़ी ज़रखेज़ है साकी '
ख्वाब ही न हो तो न कवि
न कहानीकार
न व्यंग्यकार ........ कुछ भी नहीं
ये ख्वाब ही तो आदम और हव्वा हैं
श्रद्धा और मनु हैं
धर्म के नाश के साथ
ये ख्वाब ही अवतार हैं

अब तुम कहो - ख्वाब के बिना जीवन क्या ?

36 टिप्‍पणियां:

  1. ख्वाब ही तो संजीवनी हैं
    ख्वाब आकाश को धरती पर ले आते हैं
    अक्षरश: सच कहा है आपने गहन भाव लिए लाजवाब करती अभिव्‍यक्ति ... आभार

    कल 18/07/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' ख्वाब क्यों ???...कविताओं में जवाब तलाशता एक सवाल''

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  2. "ख्वाब ही तो संजीवनी हैं
    जब भूख लगती है
    और खाने को कुछ नहीं होता
    तो ये ख्वाब रोटी बन जाते हैं
    सुनाते हैं लोरियां परियों की
    जो दे जाती हैं सुनहरी भोर कुछ कर दिखाने की " पर फिर भी पेट की आग नहीं बुझती केवल ख्याव से ......
    अच्छी रचना के लिए आभार .

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  3. बिल्कुल सही
    सपने ना हों तो जीने का मकसद ही अधूरा है

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  4. कमाल हो गया एक ही दिन दोनो ने एक ही शीर्षक से पोस्ट लगा दी है :)

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  5. ख्वाब ही शोध है
    इतिहास है
    इमारत से खंडहर
    और खंडहर से इमारत है
    बिना ख्वाब के तो चाय नहीं बनती
    चिन्नी डालो
    दूध डालो
    पत्ती डालो
    अदरक, इलायची , मसाले .....
    एक चुटकी ख्वाब नहीं
    तो चाय बड़ी फीकी होती है !..bahut khub

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  6. सच है ख्वाब ही जीवन को गति देता है..बहुत सार्थक

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  7. ख्वाब संबल हैं , ख्वाब जीवन हैं. ख्वाब ही सबकुछ.

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  8. ख्वाब या विचार का ही फैलाव है संसार.....सुन्दर पोस्ट।

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  9. ख्वाब ना हो तो कवि तो हो ही नहीं सकता ....
    एकदम सच्ची !

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  10. सच है ... ख्वाब के बिना कैसा जीवन ... रेत में पानी की काना न होना ... कैसे चलेगा ..

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  11. एक चुटकी ख्वाब नहीं
    तो चाय बड़ी फीकी होती है !
    सच कहा .....सुंदर चिंतन !
    sapne jaruri hai ,

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  12. ख़्वाबों का संजीवनी सबको आनंद दे रहा है..

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  13. ख्वाब तो जीने की वजह है......
    रातों की नींद की सार्थकता है ख्वाब.....
    इनके बिना सोना और जीना दोनों बेकार..........

    सादर
    अनु

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  14. कितना सुन्दर सोच लेती हैं आप. एक ख्वाब ही तो वो जगह है जहाँ हमारी मनमानी चल सकती है. मैं तो सब उल्टा कर देती हूँ वहां, आकाश में चलती हूँ बहुत अच्छा लगता है. सचमुच ख्वाब हैं तो जीवन है. ख्वाब न हो तो कुछ भी नहीं...

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  15. लाजवाब .....बहुत सुंदर ....

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  16. जब दिल होता है बेताब
    तो देता है सहारा खाब
    इसके बिना जीवन में गति नहीं
    इसके बिन जीवन की गति नहीं।

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  17. ख़्वाब देखे बिना,जीवन लगे अधूरा
    मंजिलें मिलती,ख़्वाब हो जाता पूरा,,,,,

    भावमय बेहतरीन प्रस्तुति,,,,,

    RECENT POST ...: आई देश में आंधियाँ....

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  18. सच कहा आपने ख्याब के बिना ये जिंदगी अधूरी हैं ....

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  19. ख्वाब!! वाह...
    कुछ पल हकीकत से दूर...खूबसूरत एहसास !!!

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  20. ख्वाओं की बहुत ही सुन्दर व्याख्या ....सच में ख्वाब कितने ज़रूरी हैं .......शायद यही दुनिया की धुरी हैं ....

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  21. ख्वाब ही हमारे स्थूल जीवन में चेतना का कार्य करते हैं।

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  22. ख्वाब एक सुन्दर अहसास दिलाता है..
    ख्वाब विचारों का आकाश है..
    जो बहुत विस्तारी है और ऐसे खुले आकाश में विचरण करना.बहुत सुखदायक होता है ..बहुत सुन्दर बेहतरीन रचना..

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  23. जो सामने है वो तो है ही पर जो नहीं है उसकी ही ख़्वाहिश रहती है और उसको पाने का ही ख्वाब ... सुंदर प्रस्तुति

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  24. ek ek shabd ekdum sateek..khwaab hi to zindagi hain....bauhat acche nazm h!!

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  25. ज़रा नम हो तो यह मिट्टी बड़ी ज़रखेज़ है साकी '
    ख्वाब ही न हो तो न कवि
    न कहानीकार
    न व्यंग्यकार ........ कुछ भी नहीं
    .... सुंदर प्रस्तुति

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  26. ये ख्वाब ही ना हों तो शायद जीना भी दुरूह हो जाये..सदैव की तरह एक उत्कृष्ट प्रस्तुति...

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  27. एक चुटकी ख्वाब नहीं
    तो चाय बड़ी फीकी होती है ! bahut khoob! bade din ke baad blogs pad rahi hoon… par aapki rachnayen sabse alag hoti hain, mano ishwar ke sandesh jaisi… saadar

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  28. ख्वाब ही तो संजीवनी हैं

    सच में ख्वाब ही तो पुल बनाते हैं , खाई पाटते हैं असंभव और संभव के बीच की !

    बेहद प्रेरक रचना. शुभकामनायें.

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  29. सच कहा. बहुत अहम हैं ख्वाब जिंदगी में

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  30. ख्वाब ही तो वो बीज हैं जो हकीकत का पौधा बनेंगे । सुंदर ।

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  31. आपने भी क्या खूब ,ये पंक्तियां पढवाई हैं ,
    सुंदर शब्दों का चयन , संयोजन कर के लाई हैं ,
    दिल से निकली ,रचना ये मन को हमारे भाई है ..
    बहुत बहुत शुभकामनाएं ।


    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
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  32. इकबाल को कहते हैं -
    ' ज़रा नम हो तो यह मिट्टी बड़ी ज़रखेज़ है साकी '
    ख्वाब ही न हो तो न कवि
    न कहानीकार
    न व्यंग्यकार ........ कुछ भी नहीं
    ये ख्वाब ही तो आदम और हव्वा हैं
    श्रद्धा और मनु हैं
    धर्म के नाश के साथ
    ये ख्वाब ही अवतार हैं

    bahut sahi kaha.......khwab hai, kalpna hai to hi jeevan hai....!

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  33. ख्वाब के बिना जिन्दगी कुछ भी नहीं
    ख्वाब टूटते ही जिन्दगी मौत बन जाती है

    उत्तर देंहटाएं

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