09 जुलाई, 2008

सच्ची जीत........


ये सच है,
मैं पैसे नहीं जमा कर पायी!
ये भी सच है,
मैं रिश्तों की पोटली नहीं बाँध सकी!
मेरी बेटी ने पूछा एक दिन-"क्या मिला तुम्हे?"
मैंने सहज ढंग से कहा,
"वही-जो कर्ण को मिला....
उसने पूछा - हार?
मैंने कहा -नहीं,
वही, जो पार्थ की जीत के बाद भी
कर्ण को ही मिला.......
तुम सब ख़ुद
नाम लेते हो कर्ण का
तो फिर प्रश्न कैसा?"
वह मुस्कुराई,
उसकी आंखों में
मुझे मेरी जीत नज़र आई।
दुनिया कहती है,
"जो जीता वही सिकंदर...."
पर सत्य था कुरुक्षेत्र!
जहाँ सारथी बने कृष्ण ने
कर्ण की पहुँच से
दूर भगाया अर्जुन को,
लिया सहारा छल का,
पर मनाने न दिया जीत का जश्न..
सम्मान दिया उस तेज को..............
तो,
यही जीत होती है!

15 टिप्‍पणियां:

  1. जहाँ सारथी बने कृष्ण ने
    कर्ण की पहुँच से
    दूर भगाया अर्जुन को,
    लिया सहारा छल का,
    पर मनाने न दिया जीत का जश्न..
    सम्मान दिया उस तेज को..............
    तो,
    यही जीत होती है!

    Dil ko chhu lene wali panktiyaan !

    Deepak Gogia

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  2. Sachchai, Siddhant aur Atmsamman se samjhota nahi karna, bhale hi haar ko gale lagana pade, ye aapne aap me ek badi uplavdi hai, sachchi jeet hai.

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  3. लिया सहारा छल का,
    पर मनाने न दिया जीत का जश्न..
    सम्मान दिया उस तेज को..............
    तो,
    यही जीत होती है!

    सच है ये कानो में मिसरी सी घोलता है........
    जीत हमेशा जीतने वाले की नहीं होती है....
    याद आता है वो गीत......
    हारेगा जब जब कोई ,
    तभी तो होगी किसी की जीत.
    मुझे ना मिला ना सही,
    तुम्हे मुबारक मन का मीत.

    बहुत अच्छा लिखा है.

    avinash

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  4. जहाँ सारथी बने कृष्ण ने
    कर्ण की पहुँच से
    दूर भगाया अर्जुन को,
    लिया सहारा छल का,
    पर मनाने न दिया जीत का जश्न..
    सम्मान दिया उस तेज को..............
    तो,
    यही जीत होती है!

    बहुत सुंदर बात कह दी है आपने चंद लफ्जों में

    उत्तर देंहटाएं
  5. di! kavita ke roop main bahot khubsurat.........dil ko chhune wali.......

    par wastivkta se pare
    lekin kavi hriday aisa hi hota hai...
    aise hi jeeti hai kavi jaati:P

    jeet kee khoj main to rahte hain, par saath main unhe satya aur samman bhi chahiye

    kintu aaj ke paripekshya mai, jeet usski hai jisne dhan, jameen aur aadambar ko jeeta ho.....

    kahin, chhoti muh badi baat to nahi kar di.......

    mukesh!!

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  6. sach kaha aapne yahi jeet hai...jeet ko bayaan karne vaale shaksh ke sammukh mei natmastak hoon.aapki yah rachna jeena sikhati hai..........

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  7. सच्ची जीत से अवगत करवाने का शुक्रिया...बहुत सुंदर रचना.
    नीरज

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  8. कर्ण का सन्दर्भ इस बात की भी याद दिलाता है कि आपके सदगुण भी गलत सोहबत और प्रश्रय में अप्रासंगिक हो जाते है .द्रौपदी के साथ उसका व्यवहार अक्षम्य है.....

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  9. sahi sachhi baat,saman se badi jeet koi ahi.sundar rachana ke liye bahut badhai.

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  10. WAH.. HA.. JARURI NAHI KI JO JEETA WAHI SIKANDAR.. KAI BAAR HAAR KAR JITNE WALE KEHLATE HAIN BAAJIGAR.. BADHIYA RACHNA HAI AUR SARTHAK SOCH RAKHTI HAI YE KHUD ME.. EK SIKHSHA EK UDDESHYA HAI IS KAVITA ME.. MAI TO KHUL KE TAREEF KAUNGA IS KAVITA KI..

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  11. बहुत सही ......... महाभारत का दृष्टांत देकर आप अपनी बात समझने में सफल हो गयी है ......शुभकामनाएं रश्मि जी ........

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  12. बहुत बढ़िया ! सही दर्शन है।
    घुघूती बासूती

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  13. जो जीता वही सिकंदर...."
    पर सत्य था कुरुक्षेत्र!
    जहाँ सारथी बने कृष्ण ने
    कर्ण की पहुँच से
    दूर भगाया अर्जुन को,
    लिया सहारा छल का,
    पर मनाने न दिया जीत का जश्न..
    सम्मान दिया उस तेज को..............
    तो,
    यही जीत होती है!जो जीता वही सिकंदर...."
    पर सत्य था कुरुक्षेत्र!
    जहाँ सारथी बने कृष्ण ने
    कर्ण की पहुँच से
    दूर भगाया अर्जुन को,
    लिया सहारा छल का,
    पर मनाने न दिया जीत का जश्न..
    सम्मान दिया उस तेज को..............
    तो,
    यही जीत होती है!
    शब्द नहीं हैं मेरे पास ऐसी कल्पना और ऐसी सोच को प्रकट करने क लिए

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  14. बहुत सुंदर बात कह दी है आपने चंद लफ्जों में

    truly inspiring.

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प्रभु

देनेवाले, तेरा दिया तुझे ही देकर सब बहुत खुश हैं ! सोने से तुम्हें सजाकर डालते हैं एक उड़ती दृष्टि अपने इर्दगिर्द और मैं तोते की...