29 जुलाई, 2008

पास से गुजरते कुछ ख्याल....


( १ )
वे तो अपने होते हैं
जिनकी आंखों में
दर्द पनाह लेता है
और सीने में
जब्त होती हैं सिसकियाँ.......
एक-एक स्पर्श
एक नई जिंदगी,
नई उम्मीद का सबब बन जाता है........

( २ )
जिनके पाँव के नीचे से
मैंने कांटे चुने,
या खुदा !
वे कहते हैं-
मुझे कांटे बिछाने की आदत है !
क्या सोचूं?
वे मेरा अस्तित्व मिटाना चाहते हैं
या ख़ुद के सामर्थ्य का
झंडा लहराना चाहते हैं !

( ३ )
शिकायत उनसे होती है
जो शिकायत का मान रखते हैं
यूँ ही सबों से शिकायत........
शिकायत का भी अपमान होता है !

( ४ )
जिसका दर्द गहरा होता है
उसकी सहनशीलता भी गहरी होती है
सतही दर्द में
अविरल आंसू बहते हैं
चेहरा गमगीन होता है !
दर्द के बीच से राह निकालनेवाले
अक्सर अन्दर सुलगते हैं
आंसू उनके सूख जाते हैं
क्योंकि वे जानते हैं-
" दर्द रोने से कम नहीं होगा ......."

28 टिप्‍पणियां:

  1. ........वे तो अपने होते हैं
    जिनकी आंखों में
    दर्द पनाह लेता है.....

    In real sense, I have no words to comments that you have written with just a good sense of literature and you used your words where they should be used.

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  2. जिनके पाँव के नीचे से
    मैंने कांटे चुने,
    या खुदा !
    वे कहते हैं-
    मुझे कांटे बिछाने की आदत है !

    वाह! क्या खूब लिखा है....
    'आंखें होती, तो देखती सच क्या...'

    ऊपर लगी तस्वीर बहुत अच्छी है...।

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  3. यूँ ही सबों से शिकायत........
    शिकायत का भी अपमान होता है !

    बहुत खूब.. वैसे सारी ही क्षणिकाए कमाल की है

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  4. वाह.. बहुत अच्छी कविता है चारो ही,
    पर दर्द वाली मुझे ज्यादा ही पसंद आई..
    एक साथ चार-चार बधाई..

    दर्द गर रोने से कम हो गया होता..
    तो मै रोता, और बहुत-बहुत रोता..!!

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  5. aap ko mera parnaam ..aap ki laikhni par likhna kuch bhi ...diye ko roshni dikhana hai mai aap sai maafi chaunga ..aap apnai aap mai ek gurujan hai

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  6. "जिनके पाँव के नीचे से
    मैंने कांटे चुने,
    या खुदा !
    वे कहते हैं-
    मुझे कांटे बिछाने की आदत है !"

    रश्मि जी, मैं अभी हाल में ही इस भावनात्मक अग्नि-परीक्षा से गुजरा हूँ ...
    तब जाकर इस कहावत की महत्ता का पता चला ---नेकी कर , दरिया में डाल...

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  7. सभी प्रस्तुतियां बहुत अच्छी,किन्तु दूसरे नम्बर वाली कविता दिल को छू गई.

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  8. शिकायत उनसे होती है
    जो शिकायत का मान रखते हैं
    यूँ ही सबों से शिकायत........
    शिकायत का भी अपमान होता है !

    बहुत खूब ...

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  9. बहुत ही भावुक कविताये,एक से बढ कर एक,आप ने तो दुनिया के दिल की बात ही यहा लिख दी, धन्यवाद
    शिकायत उनसे होती है
    जो शिकायत का मान रखते हैं
    यूँ ही सबों से शिकायत........
    शिकायत का भी अपमान होता है !

    उत्तर देंहटाएं
  10. js superb aunty.....aisa lagta hai jaise ye sub kuchh hamare saath hota hai hamare mun mein hota hai....actual life mein hota hai
    par hum keh nahi paate....aap hamare dil ki baat keh dete ho.....acchha lagta hai padna.........

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  11. शिकायत उनसे होती है
    जो शिकायत का मान रखते हैं
    यूँ ही सबों से शिकायत........
    शिकायत का भी अपमान होता है !
    bhut sahi. sundar.

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  12. bahut ache eracjanaon men se ek hai man ko bahut achee lagee

    sab se achee no 1 walee

    Anil

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  13. बहुत खूब.
    जीवन सत्य के बिल्कुल करीब एक रचना.
    उम्दा और बेहतरीन.

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  14. १. सुन्दर भावनाए लेकिन वो स्पर्श विश्वास से पूर्ण होना चाहिए ....
    २.बस इतना सोचिये की एक फूल हैं और काटे हज़ार अब उस फूल को रहेना तो होगा उन काटों के साथ ही कैसे भी हो चाहें कितने काँटों से बचिए लेकिन कहीं ना कहीं वो चुभता जरूर है
    ३.बिलकुल सही कहा आपने हम दुसरो की शिकायत तो बड़ी खूबी से कर देते हैं जबकि अपनी कमी कहीं महेसूस नहीं करते .......
    ४.खुद पर पूरा विश्वास होना चाहिए यदि हमने किसी का गलत नहीं किया तो भगवान् हमारा गलत कर ही नहीं सकते हर किसी को कुछ ना कुछ दुख होता है कोई संपन्न नहीं आज नहीं तो कल इश्वर हर ख़ुशी देगा बस आस्था और विश्वास की जरूरत है...
    दर्द कभी रोने से कम नहीं होता खुद पर से अपना विश्वास जरूर कम हो जाता है........

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  15. रश्मि जी
    आप के "पास से गुजरते कुछ ख्याल" दिल पर आ कर ठहर गए हैं...सारे ख्याल एक से बढ़ कर एक हैं..शब्द और भाव का अनूठा मिश्रण है आप की रचना में...बहुत आनंद आया पढ़ कर...लिखती रहें
    नीरज

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  16. जिनके पाँव के नीचे से
    मैंने कांटे चुने,
    या खुदा !
    वे कहते हैं-
    मुझे कांटे बिछाने की आदत है !
    क्या सोचूं?
    वे मेरा अस्तित्व मिटाना चाहते हैं
    या ख़ुद के सामर्थ्य का
    झंडा लहराना चाहते हैं !
    .......pata nahin kya chahte hain log...bahut achchi abhivyakti..
    दर्द के बीच से राह निकालनेवाले
    अक्सर अन्दर सुलगते हैं
    आंसू उनके सूख जाते हैं
    क्योंकि वे जानते हैं-
    " दर्द रोने से कम नहीं होगा ......."
    bahut khoob didi...
    koi kehta hai aapki kavitayen mann ko chhuti hai lekin mujhe lagta hai wo mere mansen ko nikal kar bahar kagaz per utar jaati hain...

    उत्तर देंहटाएं
  17. दर्द के बीच से राह निकालनेवाले
    अक्सर अन्दर सुलगते हैं
    आंसू उनके सूख जाते हैं
    क्योंकि वे जानते हैं-
    " दर्द रोने से कम नहीं होगा ......."


    बहुत खूब..
    सुन्दर......

    लिखती रहें.....

    उत्तर देंहटाएं
  18. दर्द के बीच से राह निकालनेवाले
    अक्सर अन्दर सुलगते हैं
    आंसू उनके सूख जाते हैं
    क्योंकि वे जानते हैं-
    " दर्द रोने से कम नहीं होगा ......."

    kitna sahi likha hai jaise kisi ne mere hi shabdo ko likhd iya..dil ke jajbata shabdo mein dhal ke aankho ke samne aaye...rone se milegaa kya dard ko jinda rakh taki kabhi phir se woh dard hisse mein lene ka koi karan ban sake to usase bacha ja sake.

    bhaut khub....mujeh apni shisya bana hi lo aap

    with love

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत खूब..
    सुन्दर......

    लिखती रहें.....

    उत्तर देंहटाएं
  20. बेहद खूबसूरत...बहुत उम्दा...वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  21. .

    एक शिकायत है तो..
    पर नहीं बताता, क्योंकि
    शिकायत उनसे होती है
    जो शिकायत का मान रखते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  22. जिसका दर्द गहरा होता है
    उसकी सहनशीलता भी गहरी होती है ----सही कहा... वैसे पास से गुज़रते सभी ख्याल बेहतरीन...

    उत्तर देंहटाएं
  23. बहुत खुबसूरत, सभी क्षणिकाए एक से बढ़कर एक है और बहुत गहरी सच्चाई लिए हुए है |

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  24. शिकायत उनसे होती है
    जो शिकायत का मान रखते हैं
    bahut sundar
    www.vinayvishesh.blogspot.com

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  25. बहुत समय के बाद क्षणिकाएं पढने के मिली हैं, मजा ही आ गया। बधाई स्वीकारें।

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  26. जिनके पाँव के नीचे से
    मैंने कांटे चुने,
    या खुदा !
    वे कहते हैं-
    मुझे कांटे बिछाने की आदत है !
    क्या सोचूं?
    वे मेरा अस्तित्व मिटाना चाहते हैं
    या ख़ुद के सामर्थ्य का
    झंडा लहराना चाहते हैं !...........

    vaakai didi..... samvedansheel logo k sang to aisa hota hi hai......
    bahut khoob.....

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  27. wah didi!.....ehsaas ke samalochna ke bindu se upar ki soch hai aapki ye kavitayen....kitni sahaj hi aap itne gudh bhaav rach deti hai....ye kalatmak shaili hi aapkee rachnaon ki jaan hai....

    sabhi ek se badkar ek hain.....aur sangrhniy hain!


    ....Ehsaas!

    उत्तर देंहटाएं
  28. जिनके पाँव के नीचे से
    मैंने कांटे चुने,
    या खुदा !
    वे कहते हैं-
    मुझे कांटे बिछाने की आदत है !
    क्या सोचूं?
    वे मेरा अस्तित्व मिटाना चाहते हैं
    या ख़ुद के सामर्थ्य का
    झंडा लहराना चाहते हैं !

    बहुत सुंदर कृपया पधारें http://manoria.blogspot.com and kanjiswami.blog.co.in

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