12 जुलाई, 2008

मैं........

मैं ओस की एक बूंद,
अचानक बही एक शीतल हवा,
बांसुरी की एक मीठी तान,
घनघोर अंधेरे में जुगनू,
रेगिस्तान में दो बूंद पानी......
मुझे भूल जाना आसान नही है!!!

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपने चंद पंक्तियों में ही दर्शा दिया कि भूलना आसान नहीं नामुमकिन है
    ये तो वो ओस कि बूँद है जो मोती के समान है बस अंतर ये है मोती सीप में रहेता है और ये ओस कि बूँद प्रक्रति कि गोद में जो सूर्य कि एक किरण से ऐसे चमकती है जैसे कोई अनमोल हीरा तो इसे कैसे भुलाया जा सकता है...............

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  2. कहाँ आसान है भूलना
    सबसे कीमती चीज़ को
    रेगिस्तान में पानी और
    जीवन में माँ.
    nihaayat hi khoobsurat

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  3. एक बूंद, शीतल हवा, बांसुरी की तान, अंधेरे में जुगनू, और रेगिसतान मे दो बूंद !!
    जिसे ये मिल जाए तो परमात्मा मिल गया फिर भला परमात्मा भी कोई भुलाने की
    चीज है ? कम शब्दों में बडी गरिमा मय अभीव्यक्ति !

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  4. रश्मि जी .....आपकी रचना '' मैं''....... छोटी पर प्रभावशाली रचना है ..... शुभकामनाएं........

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  5. सुन्दर स्व- चित्रण ...
    खूबसूरत शब्द-विन्यास...

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  6. आदरणीय रश्मि जी ,

    सदर अभिवादन .....

    आपके गर्वित परिचय , संक्षिप्त पर समर्थ कविता के लिए बधाई और ,मुक्तकों के लिए सक्रिय प्रतिक्रिया हेतु बहुत आभार एवं धन्यवाद्

    यही स्नेह बनाये रखियेगा

    एक कविता भेज रहा हूँ , प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा

    समय मिलने पर इस ब्लॉग http://mainsamayhun.blogspot.com को देखियेगा
    चाहता हूँ ........
    एक ताजी गंध भर दूँ
    इन हवाओं में.....

    तोड़ लूँ
    इस आम्र वन के
    ये अनूठे बौर
    पके महुए
    आज मुट्ठी में
    भरूं कुछ और
    दूँ सुना
    कोई सुवासित श्लोक फ़िर
    मन की सभाओं में

    आज प्राणों में उतारूँ
    एक उजला गीत
    भावनाओं में बिखेरूं
    चित्रमय संगीत
    खिलखिलाते फूल वाले
    छंद भर दूँ
    मृत हवाओं मैं .....................


    डॉ उदय 'मणि ' कौशिक
    684 महावीर नगर II
    कोटा, राजस्थान

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  7. bahut-bahut shukriya. aap to mahan hai. apke shabd -shabd me samvedna nratya karti hai. aapne hausla afzaai ki. shukriya.

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  8. kitni yaade hoti hai..jo hawaa ke sath hi jahan mein aati hai aur ek jhonka yaisa hota hai jo sab kuch baha le jata hai..shayad jo bah jata hai us jhonkhe ke sath woh hai sukun...aur yahi bhav yahan mila mujeh kuch is kadar ki yaade rah gayee us sukun ke badle...kam shabdo mein jayada baate ...yaisi rachna meri pasandeeda rachna ban jati hai

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अक्षम्य अपराध

उसने मुझे गाली दी .... क्यों? उसने मुझे थप्पड़ मारा ... क्यों ? उसने मुझे खाने नहीं दिया ... क्यों ? उसने उसने उसने क्यों क्यों ...