24 जुलाई, 2008

उल्टा-पुल्टा


चाँद तो तुम्हारे शहर भी जाता है,

बातें भी होती होंगी-

कभी बताया चाँद ने

कि,

मैं चकोर हो गई हूँ,

और चाँद में तुम्हे तलाशती हूँ?

....

इस तलाश में रात गुजर जाती है

फिर सारा दिन

रात के इंतज़ार में.....

घर में कहते हैं सब,

मैं 'बावली' हो गई हूँ!

कैसे समझाऊं उन्हें

चकोर बनना कितना कठिन है !

कितना कठिन है,

चाँद को तकते रात गुजारना.....

अब तो -

चकोर भी हतप्रभ है !

चाँद की जगह मुझे निहारता है !

और मेरे इंतज़ार में

चकोरी को भूल गया है.....

क्या कहूँ?

सबकुछ उल्टा-पुल्टा हो गया है !!!!!!!!


29 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही खूबसूरती से लिखी गयी रचना.. बधाई

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  2. " सब कुछ उल्टा - पुल्टा हो गया है ....

    अच्छी संवेदनशील रचना है , रश्मि जी

    चलिए ..आज एक ग़ज़ल पोस्ट की है , देखिएगा


    जमी है बर्फ बरसों से , ज़रा सी तो पिघल जाए
    दुआएं कीजिये कुछ देर को सूरज निकल जाए

    किसी के खौफ से कोई ,यहाँ कुछ कह नहीं पाता
    मगर सब चाहते तो हैं ,कि ये मौसम बदल जाए

    करो श्रृंगार धरती का , इसे इतना हरा कर दो
    तबीयत बादलों की आप ही इसपे मचल जाए

    अँधेरा रह नहीं सकता ,किसी भी हाल में बिल्कुल
    अगर सबकी निगाहों में , सुबह का ख्वाब पल जाए

    बहुत ग़मगीन है माहौल ,कुछ ऐसा करो जिस से
    तुम्हारा दिल बहल जाए ,हमारा दिल बहल जाए
    डॉ उदय 'मणि' कौशिक
    शेष ब्लॉग पर पधारें
    http://mainsamayhun.blogspot.com

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  3. अरे ! ये क्या सब उल्टापुल्टा हो गया जिसे देख रही थी चाँद में वो तो कहीं खो गया
    अब चकोर मुझे ताकता है अपनी चकोरी समझकर मुझे चंद्रिका बनाना चाहता है
    अब मैं करूं क्या बनूं क्या उस जाने वाले का ऐसे ही चाँद को देखकर इन्जार करूं
    या बन जाउं चकोरी उस चकोर कि जो हमेशा मेरे साथ रहेगा मेरा साथ देगा किसी
    एक कि तो कहे लाउंगी मैं बन जाउं चकोरी और और बसा लूं संसार उस चंद्रलोक में
    जहाँ सब होंगे एक नदी एक नाव और चांदनी और पता है वहां होंगी मेरी सखियाँ मेरी अपनी परियाँ ..

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  4. घर में कहते हैं सब,
    मैं 'बावली' हो गई हूँ!
    कैसे समझाऊं उन्हें
    चकोर बनना कितना कठिन है !

    sach kaha didi. Ekdam sach.

    Deepak Gogia

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  5. Hello Rashmi ji,

    क्या कहूँ?


    सबकुछ उल्टा-पुल्टा हो गया है !

    Rashmi, aap really bahut achcha likhti hain. shabdon ko chun - chun kar unko sahi jagah fit karti ho app.
    i like your creations.
    Plzzz add my email: ravibhuvns@gmail.com ,so that i would get your every new posts. And if u don't mind, i would also like to add your e-mail in my blog for getting your valuable comments.

    ...Ravi
    from- Mere Khwabon me
    http://mere-khwabon-me.blogspot.com/

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  6. mai aapki tarah shabdon ki dhani to nahi.........isliye jo vichar hai unhe bata nahi sakti itna hi keh sakti hun k bahut khoobsurat........or chand to apne aap hi khoobsurti ka prateek hai........

    उत्तर देंहटाएं
  7. kya baat hai chand aur chakor dono ka rista jitna purana hai utna hi khubsurat khayalo wala..door rahke kisi ki chahat kya hoti hai is doino se ye bata achi tarah seekhi ja sakti hai.

    dil ko chhune wali rachna..kyun ki yahan pyar hai bas pyar

    sakhi pyar ke sath

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  8. अब तो -


    चकोर भी हतप्रभ है !


    चाँद की जगह मुझे निहारता है !

    Kya andaz hai virah ko vyakt karne ka ...bahut khoob !!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. सच ही है विरह की पीड़ा में मन मृग की भांति कभी मन के जंगलों में भटकता है तो कभी आकाश में विचरते चाँद से भी दो बातें करने लगता है.. फिर कोई बावरी कहे या उपहास करे man knha parwaah karta hai;इन बातों को तो वही जाने वही समझे जो इस प्यार की aag को सुलगाता भी रहे usme jalta भी rhe...
    कविता जब मन का ही hissa हो जाए तो उसकी तारीफ तो बाद बाद में paile तो usse apnapan सा lagne lagne लगता है ...!!!bahot sundar rachna.!!!!
    ...desh.

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  10. बहुत अच्छी रचना है | बहुत सादगी से आपने प्यार को बयाँ किया है |

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  11. बहुत ही सुंदर रचना है. धन्यवाद!

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  12. wakyee...chand bhee garvit hoga...khud uske chakor par.....behad utkrasth ehsaas....sundar kavita di

    ...Ehsaas!

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  13. चाँद को ढूँढता ...चकोर मन ...बहुत कोमल ...सुंदर एहसास.......!!
    ज़िन्दगी की राह पर चलता ..एक सुंदर,कोमल मन ...और उसके उतने ही कोमल एहसास !!
    सुंदर रचना ..

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  14. कभी बताया चाँद ने

    कि,

    मैं चकोर हो गई हूँ,

    और चाँद में तुम्हे तलाशती हूँ?

    और फिर चकोर का ताकना .. बहुत सुन्दर एहसास ..यह उल्टा पुल्टा भी बहुत सुन्दर एहसास है

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  15. बेहद खूबसूरती से पिरोई दिल को छू जाने वाली रचना.
    सादर,
    डोरोथी.

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  16. इश्क का ये सब उल्टा-पुल्टा कर देना ही तो ...खासियत है...
    निराले अंदाज़ में अनूठी प्रस्तुति !!

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  17. बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  18. सब कुछ उल्टा -पुल्टा हो गया ....आपकी रचना तो हमेशा प्रभावित करती हैं ..आभार

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  19. गहन अनुभूतियों में कुछ उलटा पुलटा सा लगने लगता है. सुंदर रचना.

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  20. दी ,बहुत अच्छा लिखा है .... भटका मन शांत हो जाये ऐसा है ..... सादर !

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शाश्वत कटु सत्य ... !!!

जब कहीं कोई हादसा होता है किसी को कोई दुख होता है परिचित अपरिचित कोई भी हो जब मेरे मुँह से ओह निकलता है या रह जाती है कोई स्तब्ध...