10 फ़रवरी, 2012

मरीचिका में भी क्षितिज का आधार



लिखनेवाले
एहसासों का बिछौना
एहसासों का सिरहाना
एहसासों का गिलाफ रखते हैं
साइड टेबल पर जो पानी रखा होता है
वह भी एहसासों से भरा होता है
.......
एहसासों के पैबंद
उनके पैरों की गति बन जाते हैं
पैबंद सदृश्य सराहनीय शब्द
उनका हौसला बन जाते हैं
धरती आकाश से वंचित होकर भी
उनके होने के एहसास से
वे इन्द्रधनुष का निर्माण कर लेते हैं
......
भावों का इन्द्रधनुष बारिश की प्रतीक्षा नहीं करता
शब्द ही सागर
शब्द ही मंथन
शब्द ही मौसम
शब्द ही गुबार
शब्द ही निस्तार
शब्द शब्द भावों की कस्तूरी लिए चलता है
लिखनेवाले को मरीचिका में भी
क्षितिज का आधार मिलता है
.......
सोचो - कोई यूँ ही नहीं लिखता है

35 टिप्‍पणियां:

  1. जब भाव गागर छलकने लगे ...तब......
    भावों का इन्द्रधनुष बारिश की प्रतीक्षा नहीं करता
    शब्द ही सागर
    शब्द ही मंथन
    शब्द ही मौसम
    शब्द ही गुबार
    शब्द ही निस्तार
    शब्द शब्द भावों की कस्तूरी लिए चलता है
    लिखनेवाले को मरीचिका में भी
    क्षितिज का आधार मिलता है
    .......
    सोचो - कोई यूँ ही नहीं लिखता है
    बहुत सुंदर लिखा है ...

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  2. सुन्दर ,यह भी देखने और समझने का एक नया अंदाज है !

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  3. सोचो - कोई यूँ ही नहीं लिखता है

    सच कहा दी....कोई यूँ ही नहीं लिखता..
    बहुत सुन्दर..
    सादर.

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  4. एहसास को महसूस कर शब्दों के रूप में मोती लुटा दिए जाते हैं .. सच कोई यूँ ही नहीं लिखता ...बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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  5. दीदी,
    आपने तो किसी भी साहित्यिक सर्जना की मिट्टी में दबे बीज को व्याख्यायित कर दिया है.. सचमुच जब एहसास के बीज, दिल-दिमाग की मिट्टी में अंकुरित होते हैं, तो शब्द के पौधे जन्मते हैं और तब जाकर रची जाती है एक कविता. सच कहा दीदी, कोई यूं ही नहीं लिखता!!

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  6. लिखनेवाले को मरीचिका में भी
    क्षितिज का आधार मिलता है
    .......
    सोचो - कोई यूँ ही नहीं लिखता है

    सहीकहा ……

    लिखने वाला तो
    शब्दों को ही
    ओढता बिछाता है
    शब्दों मे ही
    काल्पनिकता को
    यथार्थ के धरातल
    पर लाता है
    और फिर वापस
    उसे वहीं पहुँचा देता है
    ये कमाल तो सिर्फ़
    लिखने वाला ही
    कर सकता है
    शायद इसीलिये
    वो लिखता है क्योंकि
    उसका मानसिक सुकून तो
    उसके शब्दों मे ही होता है

    बस यही कह सकती हूँ।

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  7. लिखने वालो के लिए शब्दों और भावनाएं ही सब कुछ हो जाती हैं ...ये आपसे ही सीखा हैं रश्मि दीदी

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  8. बिलकुल सही और सत्य सोचा , अक्षरश: सत्य और सुन्दर..

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  9. सोचो - कोई यूँ ही नहीं लिखता है
    यह एक पंक्ति इस रचना की जान जैसे ... जहां कुछ कहना शेष नहीं रहता ... आभार

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  10. साइड टेबल पर जो पानी रखा होता है
    वह भी एहसासों से भरा होता है


    बेहतरीन पंक्तियाँ दीदी ... मन को छुं गई ...

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  11. सही कहा है आपने..सुन्दर शब्द संचय..
    kalamdaan.blogspot.in

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  12. कुछ लोग यूँ ही भी लिखते हैं दी :).
    बहुत सुन्दर कविता है.

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  13. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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  14. एहसासों के पैबंद ,
    उनके पैरों की गति बन जाते हैं ,
    पैबंद सदृश्य सराहनीय शब्द ,
    उनका हौसला बन जाते हैं ,
    धरती आकाश से वंचित होकर भी ,
    उनके होने के एहसास से ,
    वे इन्द्रधनुष का निर्माण कर लेते हैं.... !!
    ********************************
    आपके शब्द.... ! दूसरों के एहसासों को भी ,
    इन्द्रधनुष का निर्माण करने में ,
    हौसला बन जाते हैं.... !! आभार.... !

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  15. सही कहा आपने कोई यूँ ही लिखता है.... जो इन्हें महसूस करता है.. उन शब्दों को जीता है... वही लिखता है.....

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  16. शब्द ही सागर
    शब्द ही मंथन
    शब्द ही मौसम
    शब्द ही गुबार
    शब्द ही निस्तार

    सब कुछ दिया आपने..... बहुत ही बढ़िया

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  17. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार ११-२-२०१२ को। कृपया पधारें और अपने अनमोल विचार ज़रूर दें।

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  18. इन एहसासों का ही सहारा है......

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  19. शब्द-शब्द अपने आप में सागर
    को समैंटे है अपने मन में। कुछ
    सोचने को बाध्य करती है
    आपकी ये रचना।
    अति सुन्दर।
    धन्यवाद।
    आनन्द विश्वास

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  20. शब्द शब्द भावों की कस्तूरी लिए चलता है
    लिखनेवाले को मरीचिका में भी
    क्षितिज का आधार मिलता है

    सच कहा आपने

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  21. शब्द शब्द ने कहे इस कविता का सार
    मरीचिका में भी मिल जाता कविता को आधार

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  22. "भावों का इन्द्रधनुष बारिश की प्रतीक्षा नहीं करता "

    बिलकुल सटीक बात कही आंटी।

    सादर

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  23. जो मन में आया कागज में शब्‍दों का आकार दे दिया....
    सुंदर भावपूर्ण रचना।

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  24. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर की जाएगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  25. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर की जाएगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  26. सही कहा रश्मि जी आपने.जो शब्दो में जीता है वही लिखता सकता है ...बहुत सुन्दर भाव...आभार..

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  27. बहुत सुन्दर सृजन,बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" की नवीनतम पोस्ट पर पधारकर अपना स्नेह प्रदान करें.

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  28. अहसास करने की क्षमता ..भावों को शब्द दे देती है...

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  29. भावों का इन्द्रधनुष बारिश की प्रतीक्षा नहीं करता ...
    बहुत सुन्दर रचना दी...
    सादर.

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  30. बेहतरीन भावाभिव्यक्ति...

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प्रभु

देनेवाले, तेरा दिया तुझे ही देकर सब बहुत खुश हैं ! सोने से तुम्हें सजाकर डालते हैं एक उड़ती दृष्टि अपने इर्दगिर्द और मैं तोते की...