निर्णय ज़रूरी है
एक चिड़िया के लिए
एक माँ के लिए,
आंधियों का क्या कहना,
कई बार दूसरों की नज़र का सुकून भी
गले से नीचे नहीं उतरता,
पर एक एक निर्णय के पहले
उड़ान भर लेने से पहले
नन्हें चूजों के मासूम सुकून को
देखना होता है,
जिनसे सुबह होती है
बहारें आती हैं
जिनकी दृष्टि और समझ
बड़ी सूक्ष्म होती है ...
कहते हैं न कि जहाँ न पहुंचे रवि
वहाँ पहुंचे कवि"
बिल्कुल यही बात बच्चों पर भी लागू होती है
एक पिता नजरअंदाज भी कर दे
लेकिन गर्भनाल के रिश्तों को अनदेखा अनसुना करना
संभव ही नहीं ।
उनकी मानसिक,आत्मिक खुराक को समझना होता है
किताब,कॉपी के किस पन्ने से उसे बेहद लगाव है,
इसे अनदेखा करना,
उसके मन पर बेतरतीबी से खींची गई
लकीरें बन जाती हैं ।
आँधी जैसी भी हो,
अनहोनी लाख सर पटके
लेकिन एक बच्चे के लिए माँ
वह सब बन जाती है,
जिसकी कल्पना उसने भी नहीं की होती है !
ज़रूरी है उनके मन की थाह
एक माँ अगर उस गहराई से दूर रह जाये
तो मुश्किल है उसमें कागज़ की नाव भी चलाना ...
परिस्थितियों को उनके अनुकूल करते करते
माँ होम होती चली जाती है
राख हो जाती है,
अस्थियां जलमग्न हो जाती हैं
लेकिन,
नाव से उतरने के पहले
झंझावातों का
सामना करने के लिए
दोनों हाथों से गढ़े गए हाथों में
एक मजबूत पतवार थमा जाती है ।










