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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

06 जुलाई, 2011

ऐसा होता है न ???



ब्लॉग लिखती हूँ
तो क्या
आपके कहे अनुसार -
गहन अर्थ कहती हूँ
तो क्या
मेरे कुछ शब्द
गुरु बन जाते हैं
तो क्या ...
लिखने से परे
शून्य में ब्रह्माण्ड को ढूंढती हूँ मैं
तो क्या !!!
जब भी हम और आप
होते हैं रूबरू आम बातों में
तो एक गुल्बुला बच्चा
झांकता है हमारी आँखों से
हँसता है शरारत से
ठुनकता है मचलता है
कागज़ की नाव बनाता है
ऊँचे टीले पर चढ़
मिट्टी से खेलता है ...
हम आपस में एक दूसरे को
बुद्धिजीवी कह तो लेते हैं
पर खिलौने घर में जाकर ही
एक सुकून मिलता है ....
दिल पे रखकर कहो हाथ
ऐसा होता है न ???

49 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल्…………सुन्दर भाव संग्रहण्।

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  2. हाँ होताहै न .....आपको कैसे पता?

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  3. ऊँचे टीले पर चढ़
    मिट्टी से खेलता है ...
    हम आपस में एक दूसरे को
    बुद्धिजीवी कह तो लेते हैं
    पर खिलौने घर में जाकर ही
    एक सुकून मिलता है ....
    दिल पे रखकर कहो हाथ
    ऐसा होता है न

    nice

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  4. हम आपस में एक दूसरे को
    बुद्धिजीवी कह तो लेते हैं
    पर खिलौने घर में जाकर ही
    एक सुकून मिलता है ...

    वाह ..आज कल मैं तो गुल्बुलू बच्चे के साथ ही खेलती हूँ और बहुत बुद्धिजीवी महसूस करती हूँ :)

    बहुत प्यारी रचना

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  5. बहुत जरूरी है होना उस बच्चे का, हमारे अंदर ! हमारी भरपूर जीने और सब कुछ जानने की लालसा वही तो है !

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  6. पर खिलौने घर में जाकर ही
    एक सुकून मिलता है ....
    दिल पे रखकर कहो हाथ
    ऐसा होता है न ???

    ji bilkul aisa hi hota hai....

    apna ghar apni dehleej apnee diwar.....ye sab apne aap me bahut badi duniya samete hote hain......aur jo sukoon milta hai, adbhut hota hai.....

    behtareen rachna....

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  7. सच कहा है दी....
    शायद सभी के हिस्से का बयान है आपकी रचना...
    सादर...

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  8. सच्ची बात कह दी आपने...इतनी सरलता से...वाह

    नीरज

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  9. हम आपस में एक दूसरे को
    बुद्धिजीवी कह तो लेते हैं
    पर खिलौने घर में जाकर ही
    एक सुकून मिलता है ...

    Haan ! ais hi hota hai...

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  10. वाह!सही लिखा है।
    सभी के भीतर एक बच्चा कैद है जो बाहर निकलने के लिए मचलता रहता है।

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  11. हाँ होताहै न बिलकुल ऐसा ही होता है ....बहुत सुन्दर रचना.......

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  12. गुलज़ार भी मानते हैं...दिल तो बच्चा है...

    जीने का मज़ा बुद्धिजीवी बन के नहीं मिल सकता...किसी लेखक ने अपने जीवन के अंतिम समय में कहा...कि...इस जनम में तो मै भरे दिमाग और खाली पेट के साथ रहा...अगले जनम में मै इसका उल्टा चाहता हूँ...

    वो सुखी हैं जिनके दिमाग पर लोड नहीं है... बुद्धिजीवी बेचारा तो दूसरों का लोड लिए फिर रहा है...

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  13. दिल पे रखकर कहो हाथ
    ऐसा होता है न ???
    bilkul aisa hi hota hai.......

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  14. हाँ होता है ...बिलकुल ऐसा ही होता है ...!!
    आज अच्छा लगा जान कर ..बहुत लोग ऐसा सोचते हैं ...
    सब के मन की बात लिख डाली रश्मि दी ....!!
    kamaal hai ...!!

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  15. सच है..ऐसा ही होता है...नो मोर बुद्धिजीवी खेल... :).जी चाहता है उस बच्चे के साथ ही खेला जाए बस..

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  16. आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

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  17. दिल पे रखकर कहो हाथ
    ऐसा होता है न ||

    बहुत सुन्दर ||
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  18. जब भी हम और आप
    होते हैं रूबरू आम बातों में
    तो एक गुल्बुला बच्चा
    झांकता है हमारी आँखों से
    हँसता है शरारत से

    बिल्‍कुल ... जब मां सामने हो तो और ज्‍यादा शरारत सूझती है :)

    उत्तर देंहटाएं
  19. हाँ जो भी शब्दों को कागज़ पे उतारते हैं....रचना में बांधते हैं...उन सभी को ऐसा ही लगता है..........

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  20. waaaaaaaaaah didi ekdam bachha ho aap to sach me
    kavita padha kar bahut pyaar aa raha hai ap par...
    paon chhu raha hun.

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  21. जब भी हम और आप
    होते हैं रूबरू आम बातों में
    तो एक गुल्बुला बच्चा
    झांकता है हमारी आँखों से
    हँसता है शरारत से
    ठुनकता है मचलता है
    कागज़ की नाव बनाता है............एक अनदेखा सच!!!

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  22. हम आपस में एक दूसरे को
    बुद्धिजीवी कह तो लेते हैं
    पर खिलौने घर में जाकर ही
    एक सुकून मिलता है ....
    दिल पे रखकर कहो हाथ
    ऐसा होता है न ???
    ...bahut achha sawal!....sach mein budhhijivi kahalana jinta saral hai utna hi vastavik dharatal par chalna kathin..

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  23. बिल्कुल सच। बहुत सुंदर भाव और रचना
    आभार

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  24. सुंदर भावाभिव्यक्ति....

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  25. naaaaaaaaaaaaa....mera sath to aisa nahi hota...bas itna hota hai ki ....me baccha hoti hun.....aur aap mano koi meri teacher ji....ha.ha.ha.

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  26. 'दिल पे रखकर कहो हाथ
    ऐसा होता है न ???'

    ...वाक़ई ऐसा ही होता है

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  27. बिल्‍कुल ऐसा होता है .....बहुत ही अच्‍छी रचना ।

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  28. हर man की baat likh di aapne ... apne dil की kalam से
    komal ehsason की ati सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  29. हर man की baat likh di aapne ... apne dil की kalam से
    komal ehsason की ati सुन्दर प्रस्तुति

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  30. बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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