08 जुलाई, 2011

उड़ना तो होगा ही



मन के, दिमाग के हर किवाड़
खुलते और बन्द होते रहते हैं
फिर जाकर आकार लेते हैं कुछ भाव
जो अनवरत किसी टूटे हिस्से से
टपकते रहते हैं .....
जी में आता है
लगा दूँ एक कटोरा
फिर लगता है -
कितने कटोरे बदलूंगी
यह तो समाधान नहीं ...
नीचे रख दूँ एक मोटा कपड़ा
फिर ख्याल आता है -
गीले होकर भारी हो जायेंगे
और फिर निचोड़ते निचोड़ते
मैं ही हलकान होती रहूंगी ....
किवाड़ भी कैसे बन्द करूँ -
सांकल नहीं
.......... तब उदाहरणों को करीने से रखती हूँ
उनसे देर तक आँखें मिलाती हूँ
धीरे धीरे बन्द होते खुलते किवाड़
स्थिर हो जाते हैं
छन छन कर टपकती भावनाएं
जम जाती हैं
अगले दिन के इंतज़ार में
चिड़िया घोंसले से झांकती है
- उड़ना तो होगा ही .........

45 टिप्‍पणियां:

  1. wow...superb...भावों पर कोई कण्ट्रोल नहीं होता.

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  2. खूबसूरत कविता... हौसला बढाती हुई

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  3. वाह - उड़ना तो होगा ही - और बूंदे भी गिरती ही रहेंगी अनवरत ...

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  4. धीरे धीरे बन्द होते खुलते किवाड़
    स्थिर हो जाते हैं
    छन छन कर टपकती भावनाएं
    जम जाती हैं
    भावनाएं ....और आपके शब्‍द नि:शब्‍द कर जाते हैं ... ।

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  5. चिड़िया घोंसले से झांकती है
    उड़ना तो होगा ही..
    ..इन दो पंक्तियों ने कविता को बेहद खूबसूरत बना दिया है।...वाह!

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  6. फिर जाकर आकार लेते हैं कुछ भाव
    जो अनवरत किसी टूटे हिस्से से
    टपकते रहते हैं .....

    भावों का टपकना बदस्तूर जारी रहना चाहिए ...

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  7. अगले दिन के इंतज़ार में
    चिड़िया घोंसले से झांकती है
    - उड़ना तो होगा ही .........


    vry motivational :)

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  8. अगले दिन के इंतज़ार में
    चिड़िया घोंसले से झांकती है
    - उड़ना तो होगा ही .........
    bahut sunder bhav ...

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  9. भावो की उडान अनवरत चलती रहनी चाहिये…………सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  10. कल शनिवार (०९-०७-११)को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा होगी नयी-पुराणी हलचल पर |कृपया आयें और अपने शुभ विचार दें ..!!

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  11. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (09.07.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  12. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (09.07.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  13. Haaa ... उड़ना तो होगा ही .........Ilu..!

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  14. अगले दिन के इंतज़ार में
    चिड़िया घोंसले से झांकती है
    - उड़ना तो होगा ही .........
    bahut saarthak rachna, badhai.

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  15. धीरे धीरे बन्द होते खुलते किवाड़
    स्थिर हो जाते हैं
    छन छन कर टपकती भावनाएं
    जम जाती हैं
    अगले दिन के इंतज़ार में
    चिड़िया घोंसले से झांकती है
    - उड़ना तो होगा ही .....
    ..yahi to jeewan kee nirantarta hai..
    bahut badiya bhavabhivykti..

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  16. छन छन कर टपकती भावनाएं
    जम जाती हैं ..
    कितनी बार ऐसा होता है ...बहुत सुन्दर.

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  17. sach hai udna to hoga hi...barish to tham bhi jayegi lekin bhavnayen kahan thamne wali....bahut sundar

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  18. bahut sundar rashmi ji...udna to hoga hi theek vaise jaise insan ko jina to hoga hi chahe kuchh bhi ho jina to hoga hi

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  19. छन छन कर टपकती भावनाएं
    जम जाती हैं
    अगले दिन के इंतज़ार में
    उड़ना तो होगा ही .........

    bahut hi sundar rachna..

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  20. भावों का कटोरा और उनका चिड़िया सा उड़कर कविता बन जान ...
    सब कमाल !

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  21. दी ,यही तो वास्तविक भावनायें हैं .....सादर !

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  22. एक प्रभावशाली रचना,जो मन और मस्तिष्क पर प्रभाव छोडती है.साधुवाद.
    आनन्द विश्वास

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  23. बिना उड़े मंजिल कहाँ मिलती है दीदी उड़ना तो होगा ही :)
    बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना |

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  24. बहुत सुंदर, क्या कहने

    चिड़िया घोंसले से झांकती है
    उड़ना तो होगा ह

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  25. चिड़िया घोंसले से झांकती है
    उड़ना तो होगा ही

    खुबसूरत भाव

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  26. एक छोटा सा शब्द जो मरा जाता है आपकी रचना पर - खूबसूरत !

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  27. उड़ना तो होगा ही ...

    कोमल भावों की बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

    ह्रदय की रचना ....ह्रदय तक पहुँचती है...

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  28. छन छन कर टपकती भावनाएं
    जम जाती हैं
    अगले दिन के इंतज़ार में
    चिड़िया घोंसले से झांकती है
    - उड़ना तो होगा ही .........ekdam sahi hai.....udna hi hoga.....

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  29. उड़ना तो होगा ही ..बहुत ही गहरी अभिव्यक्ति... सुन्दर

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  30. मन के, दिमाग के हर किवाड़
    खुलते और बन्द होते रहते हैं
    फिर जाकर आकार लेते हैं कुछ भाव
    जो अनवरत किसी टूटे हिस्से से
    टपकते रहते हैं .....

    अत्यंत प्रभावी पंक्तियाँ!
    हमज़बान की नयी पोस्ट http://hamzabaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_09.html में आदमखोर सामंत! की कथा ज़रूर पढ़ें

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  31. उड़ना तो होगा ही .........

    बिलकुल सही कहा है आपने उड़ना होगा एक नयी उमंग के साथ......... प्रभावशाली रचना.........

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  32. सच है ... भाव पर कोई कंट्रोल नहीं होता ... लाजवाब रचना ...

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  33. मन के, दिमाग के हर किवाड़
    खुलते और बन्द होते रहते हैं
    फिर जाकर आकार लेते हैं कुछ भाव
    जो अनवरत किसी टूटे हिस्से से
    टपकते रहते हैं .....
    ...सुन्दर भावपूर्ण रचना |

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  34. - उड़ना तो होगा ही .........

    बेहद संवेदन शील ..इस एक वाक्य में मानो सारी स्रष्टि ही समां गई हैं ....

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  35. उड़ना तो होगा ही....
    अद्भुत....
    सादर....

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  36. उड़ना ही नियति है ...इस जीवन की .... आपके विचार हर बार पढ़ कर बहुत अच्छा लगता है
    आभार

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