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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

06 अप्रैल, 2012

मेरा सपना साकार करो



ओ कृष्ण कृष्ण
मैं हुई गोकुळ ....
यमुना कह लो या कहो कदम्ब ,
ढूंढ लो मुझको बांसुरी में ,
खग भी हूँ मैं , लकुटिया भी
सेस गनेस महेस दिनेस हूँ मैं
आदि अनादि
अनंत अखंड
अच्छेद अभेद सूबेद हूँ मैं
छोहरिया मैं और छाछ भी मैं
धूरि बनी मैं चरणों की
बनी तेरी ही सुन्दर चोटी
पग में बजती पैंजनिया
तेरी मंद मंद मुस्कान बनी
खुद से खुद की सौतन हो गई
कभी राधा हूँ कभी मीरा सी
सत्यभामा और रुक्मिणी सी
..... आरम्भ हूँ मैं माँ देवकी सी
विस्तार हूँ मैं यशोदा सी
पुकारो पुकारो पुकारो मुझे
मईया कहकर
राधा कहकर
उपकार करो सुदामा हूँ मैं
सुदर्शन चक्र बना धारण कर लो
मोर मुकुट बना मेरा मान गहो
ओ कृष्ण कृष्ण हुंकार करो
हुआ धर्म का नाश
अवतार धरो , मेरी बांह गहो
मेरा सपना साकार करो
.... अवतार धरो अवतार धरो ...

38 टिप्पणियाँ:

संजय भास्कर ने कहा…

पावन स्नेह भावपूर्ण कोमल अतिसुन्दर अभिव्यक्ति...

संजय भास्कर ने कहा…

सुदर्शन चक्र बना धारण कर लो
मोर मुकुट बना मेरा मान गहो
ओ कृष्ण कृष्ण हुंकार करो
हुआ धर्म का नाश
अवतार धरो , मेरी बांह गहो
मेरा सपना साकार करो
.... अवतार धरो अवतार धरो ...


.......गहरी बात बताती समझाती प्रासंगिक पंक्तियाँ.... बहुत उम्दा रचना

ऋता शेखर मधु ने कहा…

अवतार की जरूरत तो है...

अनुपमा पाठक ने कहा…

सुन्दर!
भक्त हृदय के सुन्दर उद्गार!

वन्दना ने कहा…

कभी राधा हूँ कभी मीरा सी
सत्यभामा और रुक्मिणी सी
..... आरम्भ हूँ मैं माँ देवकी सी
विस्तार हूँ मैं यशोदा सी


मै ही भक्त मै की कृष्ण
भेद विभेद कहाँ से पाऊँ
श्याम मै श्याम हो जाऊँ
चरण कमल मे यूँ लिपटा लो
मुझको अपनी दासी बना लो

Maheshwari kaneri ने कहा…

..वाह: बहुत सुन्दर तेरे लिए मैं क्या-क्या न बनी..अब तो आजा..दर्शन दिखा जा ....वाह: बहुत सुन्दर...

expression ने कहा…

सुन लो कान्हा.............हमारी दी की पुकार....

सादर.

Kailash Sharma ने कहा…

कभी राधा हूँ कभी मीरा सी
सत्यभामा और रुक्मिणी सी
..... आरम्भ हूँ मैं माँ देवकी सी
विस्तार हूँ मैं यशोदा सी
पुकारो पुकारो पुकारो मुझे
मईया कहकर
राधा कहकर

....बहुत सुन्दर भक्तिमयी भावपूर्ण रचना...आभार

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

waah .....very nice...

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर
क्या कहने

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

कृष्ण को पुकारती यह कव्यांजलि बहुत मुग्ध करने वाली है ...

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

हुआ धर्म का नाश
अवतार धरो , मेरी बांह गहो
मेरा सपना साकार करो
.... अवतार धरो अवतार धरो ...
आपका आह्वाहन सफल हो .... !!
सारे सपने साकार हो.... !!
यूँ लगा ..... मानो आपने रण-भूमि में जो अवतार कृष्ण ने अर्जुन को दिखलाये थे उसका दर्शन करा दीं .... !!

संध्या शर्मा ने कहा…

ओ कृष्ण कृष्ण हुंकार करो
हुआ धर्म का नाश
अवतार धरो , मेरी बांह गहो
मेरा सपना साकार करो
.... अवतार धरो अवतार धरो ...
अब और देर ना करो... सुन्दर आव्हान करती रचना... सादर

CS Devendra K Sharma "Man without Brain" ने कहा…

krishna krishna awtaar dharo!

bahut sunder rachna!

asha hai jld hi shrikrishna awtaar dharenge!

lokendra singh rajput ने कहा…

हुआ धर्म का नाश
अवतार धरो....
बहुत बढ़िया.... भावपूर्ण कविता

Madhuresh ने कहा…

ये तो बिलकुल भजन सा है... अध्यात्म और भक्ति का निचोड़ लिए हुए...

vandana ने कहा…

मोर मुकुट बना मेरा मान गहो


बहुत सुन्दर

yashoda agrawal ने कहा…

रश्मि जी
राधे राधे
सुन्दर रचना....
सब चोर नहीं होते
मैं पहली रचना को फेसबुक में शेयर करना चाह रही थी.. पर असफल हुई...
उपाय अब आप ही बताएंगी
सादर
यशोदा

सदा ने कहा…

..... आरम्भ हूँ मैं माँ देवकी सी
विस्तार हूँ मैं यशोदा सी
पुकारो पुकारो पुकारो मुझे
मईया कहकर
राधा कहकर
उपकार करो सुदामा हूँ मैं
सुदर्शन चक्र बना धारण कर लो
यह निश्‍छल भाव ... और आपका लेखन ..आभार

Amrita Tanmay ने कहा…

मंदिर की घंटी की तरह मधुर-मधुर बजती हुई अति सुन्दर काव्य....बहुत-बहुत बधाई..

dheerendra ने कहा…

....बहुत सुन्दर भक्तिमयी भावपूर्ण रचना...
आभार

अच्छी प्रस्तुति........

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....

Brijendra Singh... (बिरजू, برجو) ने कहा…

कृष्ण को चारों तरफ से घेर लिया..अब तो उन्हें आना ही पड़ेगा..बेहद सुंदर भाव.. :)

mridula pradhan ने कहा…

behad bhawbhini......

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आस-पुकार उठे चहुँ दिसि यह..

Onkar ने कहा…

bahut sundar rachna

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

आज रंग है ऐ माँ रंग है री,
मेरे महबूब के घर रंग है री।

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


इंडिया दर्पण
की ओर से शुभकामनाएँ।

नीरज गोस्वामी ने कहा…

रश्मि जी आपकी रचनाओं की प्रशंशा करने वाले शब्दों का अकाल पड़ गया है मेरे पास...कहाँ से लाऊं...हर बार चमत्कृत कर देती हैं आप...बेजोड़ रचना

नीरज

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Ati Sunder..... Adbhut Rachna

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कृष्ण की पुकार में कभी गोकु;ल तो कभी राधा तो कभी रुक्मणि ... जो भी उसे पुकारता है वो भी कृष्णा हो जाता है ...

वर्ज्य नारी स्वर ने कहा…

मनमोहक कविता।

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

अब तो अवतार ले ही लो...कितनी प्रतीक्षा ? सारगर्भित रचना, बधाई.

Anupama Tripathi ने कहा…

पूर्ण समर्पण .......
तुम मैं ...मैं तुम ....
हरी हरी भजते भजते ....
हरी ने हर ली पीड़ा ...
मन हो गया हरा हरा ....!!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 10/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Saras ने कहा…

...चाहे किसी बहाने ...किसी रिश्ते ...किसी नाम के सहारे आओ .....बस आ जाओ !!!
वाह ...बहुत सुन्दर !!!!!

Pallavi ने कहा…

वाह बस एक ही शब्द लाजवाब....

Dr.Nidhi Tandon ने कहा…

देखो न...हर तरह से..हर रूप में बुला रही हूँ तुम्हें....चले,आओ न...सुनके मेरी पुकार.

sushma 'आहुति' ने कहा…

कभी राधा हूँ कभी मीरा सी
सत्यभामा और रुक्मिणी सी
..... आरम्भ हूँ मैं माँ देवकी सी
विस्तार हूँ मैं यशोदा सी
पुकारो पुकारो पुकारो मुझे
मईया कहकर
राधा कहकर.....speechless....