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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

24 अप्रैल, 2012

ऐसी माँ ही ईश्वर होती है !



प्यार करनेवाली माँ
जब नीम सी लगने लगे
तो समझो -
उसने तुहारी नब्ज़ पकड़ ली है
और तीखी दवा बन गई है !
याद रखो -
जो माँ नौ महीने
तुम्हें साँसें देती है
पल पल बनती काया का
आधार बनी रहती है
तुम्हारी नींद के लिए
पलछिन जागती है
वह तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती है
तब तक -
जब तक नीम का असर
फिर से जीवन न दे जाए !
माँ प्यार करती है
दुआ बनती है
ढाल बनती है
तो समय की माँग पर
वह नट की तरह रस्सी पर
बिना किसी शिक्षा के
अपने जाये के लिए द्रुत गति से चल सकती है
अंगारों पर बिना जले खड़ी रह सकती है
वह इलाइची दाने से कड़वी गोली बन सकती है
जिन हथेलियों से वह तुम्हें दुलराती है
समय की माँग पर
वह कठोरता से तुम्हें मार सकती है ...
तुम्हें लगेगा -
माँ को क्या हुआ !
क्योंकि तुम्हें माँ से सिर्फ पाना अच्छा लगता है
यह तुम बाद में समझोगे
कि माँ उन चीजों को बेरहमी से छीन लेती है
जो तुम्हारे लिए सही नहीं
और सही मायनों में
ऐसी माँ ही ईश्वर होती है !

40 टिप्‍पणियां:

  1. यह तुम बाद में समझोगे
    कि माँ उन चीजों को बेरहमी से छीन लेती है
    जो तुम्हारे लिए सही नहीं

    ऐसी ही माँ बनना उचित है...वर्तमान की कठोरता में कोमल भविष्य छुपा है,यह उन्हें बाद में समझ में आएगा|

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  2. यह तुम बाद में समझोगे
    कि माँ उन चीजों को बेरहमी से छीन लेती है
    जो तुम्हारे लिए सही नहीं
    और सही मायनों में
    ऐसी माँ ही ईश्वर होती है !

    ....बिलकुल सच...माँ के अंतर्मन का बहुत सुन्दर और भावपूर्ण चित्रण...

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  3. क्योंकि तुम्हें माँ से सिर्फ पाना अच्छा लगता है
    यह तुम बाद में समझोगे
    कि माँ उन चीजों को बेरहमी से छीन लेती है
    जो तुम्हारे लिए सही नहीं
    और सही मायनों में
    ऐसी माँ ही ईश्वर होती है !

    Wah ...Kitna stekk spasht sach....

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  4. माँ के प्यार में निस्वार्थ भाव को समेटती आपकी खुबसूरत रचना.....

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  5. वाह!!!!बहुत सुंदर प्रस्तुति और भावपूर्ण रचना

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  6. अंगारों पर बिना जले खड़ी रह सकती है
    वह इलाइची दाने से कड़वी गोली बन सकती है
    ऐसी माँ ही ईश्वर होती है .... ! सच में 100% ऐसी माँ ही ईश्वर होती है .... !!

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  7. मां तो अखरोट की गिरी की तरह है....ऊपर से सख्त और भीतर नर्म,,,,,
    और सिवा आपके हित के जो कुछ सोचती नहीं...

    बहुत प्यारे भाव दी.

    सादर.
    अनु

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  8. माँ को बच्चों की भलाई के लिए नीम जैसा भी बनना पड़ता है ...बहुत सशक्त भाव

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  9. काश बस थोड़ा सा वह आत्मबल हममें भी आ जाए ,माँ जैसे हो जाएँ हम. माँ के जाए कहलायें हम .
    रविवार, 22 अप्रैल 2012
    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
    डॉ. दाराल और शेखर जी के बीच का संवाद बड़ा ही रोचक बन पड़ा है, अतः मुझे यही उचित लगा कि इस संवाद श्रंखला को भाग --तीन के रूप में " ज्यों की त्यों धरी दीन्हीं चदरिया " वाले अंदाज़ में प्रस्तुत कर दू जिससे अन्य गुणी जन भी लाभान्वित हो सकेंगे |

    वीरेंद्र शर्मा(वीरुभाई )
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  10. बिलकुल, ऐसी ही माँ ईश्वर होती है...

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  11. वह तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती है
    तब तक -
    जब तक नीम का असर
    फिर से जीवन न दे जाए !
    यही तो माँ का जादू है ...

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  12. माँ जैसी बस माँ ही होती है..बहुत सुंदर कविता !

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  13. कुछेक को छोड़कर , अधिकतर माएं ऐसी ही होती हैं .
    सुन्दर प्रस्तुति .

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  14. अपने बच्चे के भले के लिए माँ कुछ भी कर सकती है.

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  15. प्यार करनेवाली माँ
    जब नीम सी लगने लगे
    तो समझो -
    उसने तुहारी नब्ज़ पकड़ ली है...
    ....सुन्दर प्रस्तुति.

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  16. मां की ममता के साथ कठोरता भी अच्छी ही होती है।

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  17. माँ की रोकटोक उनके भले के लिए ही होती है और इसमें कभी सख्ती और कभी नरमी बरतती है , वही तो ईश्वर भी करता होगा !!
    खूबसूरत रचना !

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  18. बच्चों को ये एहसास शायद माँ-बाप बनने के बाद ही होता है...नीम की डोज़ जरुरी है...

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  19. इसलिए माँ सर्वोपरि होती है..ईश्वर सी..आपको नमन..

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  20. इश्वर स्वरूपा माँ ही भेद कर सकती है अछे और बुरे में ..... बाद में याद आता है " माँ दे हथा विच बणी रोटियां खाणु बड़ाइ दिल करदा ..."

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  21. आपकी पोस्ट कल 26/4/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 861:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  22. कि माँ उन चीजों को बेरहमी से छीन लेती है
    जो तुम्हारे लिए सही नहीं
    और सही मायनों में
    ऐसी माँ ही ईश्वर होती है !
    ek kadavi sachchhai baya kar di aapne aur yahi na samjh pane ki vajah se galatfahmiyan hoti hai lekin maa to maa hi hoti hai.

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  23. यह तुम बाद में समझोगे
    कि माँ उन चीजों को बेरहमी से छीन लेती है
    जो तुम्हारे लिए सही नहीं
    और सही मायनों में
    ऐसी माँ ही ईश्वर होती है !

    jeevan ka saar hai aapki kavita mein.

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  24. बिल्कुल सही द्रष्टिकोण आपने बिल्कुल सही कहा दीदी मैं आपकी बात से सहमत हूँ बहुत सटीक आंकलन कर लिखी खूबसूरत रचना |

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