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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

21 फरवरी, 2012

एक कान से दूसरे कान



" कहने दो कोई कुछ फालतू कहता है तो
एक कान से सुनो दूसरे से निकाल दो "
मैंने अपनी छोटी बेटी की डबडबाई आँखों को
चूमकर कहा ...

उसने जो कहा
वह सुनकर मैं ठिठक सी गई
" माँ , इतना आसान नहीं
दोनों कान के बीच एक दिमाग भी तो होता है
जो इसे कैच कर लेता है ..."
छोटी होकर वह बड़ी बात सीखा गई
" सच तो ये है "

एक कान से दूसरे कान से निकालने की बात कहना
जितना सहज है उतना सरल नहीं
अगर सरल होता तो
बौखलाने की नौबत ही नहीं आती
खुद में बड़बड़ाने के हालात नहीं होते
......

हम भी न -
कई बार यूँ हीं माहौल को कूल रखने के लिए
बात को आई गई करने के लिए
कुछ भी कह देते हैं ...
....
जो बातें हर्ट करती हैं
वे आई गई नहीं हो पातीं
न एक कान से दूसरे कान तक जाती हैं
वो जो बीच में एक दिमाग है
और एक ज़ुबान है
वह भी वर्क करता है
ज़बरदस्त वर्क -
सोचके देखिये
सारे नतीजे उसी के हैं ....

45 टिप्पणियाँ:

सदा ने कहा…

वो जो बीच में एक दिमाग है
और एक ज़ुबान है
वह भी वर्क करता है
ज़बरदस्त वर्क -
अक्षरश: सही कहा है आपने इस अभिव्‍यक्ति में ...आभार

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

सही कहा आपने ! ये मुहावरा ही गलत बनाया गया है ! कायदे से होना ये चाहिए था कि कान से सुनो और मुह से निकाल दो !

उसके बाद मन भी हल्का हो जाता है !

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" ने कहा…

jubaan kaa uchit istemaal bhee
ek bahut badaa gun hai
kai baar maun rahnaa hee shreyskar hotaa hai

Dr.Nidhi Tandon ने कहा…

बिलकुल सही कहा ,आपने.एक कान से सुन के दूसरे कान से निकाल पाना आसान नहीं...क्यूंकि दिमाग होता है...बीच में.
दिमाग होता है...तभी तो दिल तक घुस जाती हैं वो बातें जो हर्ट करती हैं

RITU ने कहा…

बेकार बातों को 'एक कान से सुनकर ,दुसरे कान से निकाल देना ' ही उचित है ..
kalamdaan.blogspot.in

dheerendra ने कहा…

" माँ , इतना आसान नहीं
दोनों कान के बीच एक दिमाग भी तो होता है
जो इसे कैच कर लेता है ..."
छोटी होकर वह बड़ी बात सीखा गई
" सच तो ये है "
आपने बिलकुल सही कहा,...अच्छी अभिव्यक्ति

यादें....ashok saluja . ने कहा…

मेरी बात ..डॉ.निधि टंडन जी ने कह दी ...!
और वो भी बिल्कुल सच्ची ! डॉ.जो ...हैं!
आभार!

vidya ने कहा…

सही कहा दी...
बात कान में ना पड़े तभी आराम है वरना...
दिमाग में खलल तो होकर रहेगा..

सादर.

वाणी गीत ने कहा…

सही कहा बेटी ने ...
इतना आसान नहीं होता किसी का कुछ कहा भूल जाना ...कई बार दिल दुखाने वाले तो कुछ शब्द पूरी जिंदगी साथ चलते हैं ...ये हैं कि कुछ समय बाद हम अच्छी यादों से बुरी यादों को बदलने की कोशिश जरुर करते हैं !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

एक कान से सुनों और दूसरे से निकाल दो ... बहुत मुश्किल काम है ... दिमाग वर्क करता है ... बस उसका वर्क ऐसा हो कि अनचाही बातों पर तवज्जो न दे ॥:):)

rashmi ravija ने कहा…

यही तो मुश्किल है...
दिमाग कमबख्त बीच में आ जाता है...

दीपिका रानी ने कहा…

दिमाग में उथल पुथल मचती है, तब दिल का सहारा लिया जाता है और फिर फैसला कि बात दूसरे कान तक पहुंचानी है या नहीं..

अनुपमा पाठक ने कहा…

sach kaha...
aapki beti ne jo tark diya, yah tark ham bhi dete hain...
very practical and true...
but, forgetting and forgiving is definitely relieving!!!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

रश्मि दी!
आपकी छोटी बहन मेरी भी बहन हुई.. सच कहती है वो.. बातों के चेन रिऐक्शन होते हैं.. दो कानों के बीच दिमाग ही नहीं, दिमाग की सुनने वाला दिल भी होता है.. सब समझते बूझते भी उसे चोट तो लगती ही है.. दिल को लोग भले ही पागल कहें, मेरा मानना है कि हर समझदार को दुनिया पागल कहती है..
बड़ी समझदार है हमरी छोटी बहन, समझती है कि मुश्किल ही सही, एक कान से सुनकर दूसरे से निकालना तो होगा ही!!

संगीता तोमर Sangeeta Tomar ने कहा…

" माँ , इतना आसान नहीं
दोनों कान के बीच एक दिमाग भी तो होता है
जो इसे कैच कर लेता है ..."

पर हकीकत यह है कि हम लोगों का स्वभाव नहीं बदल सकते.....यहाँ कुछ लोग ऐसे होते है जिन्हे दूसरों के मन को ठेस पहुंचाने में आनंद आता है, तो कुछ ऐसे भी है जो कुछ भी करने से पहले सोचते है कि कहीं हमारी किसी बात से किसी का मन दुखी न हो.....जीवन तो एक गुलाब के फूल की तरह है.....जिसमें फूल के साथ काटें भी होते है.....

संध्या शर्मा ने कहा…

वो जो बीच में एक दिमाग है
और एक ज़ुबान है
वह भी वर्क करता है
ज़बरदस्त वर्क -
बिलकुल सही कहा है आपने... एक कान से दूसरे कान तक सीधा रास्ता नहीं है... गहन अभिव्‍यक्ति ...आभार

shikha varshney ने कहा…

जो बातें हर्ट करती हैं
वे आई गई नहीं हो पातीं
न एक कान से दूसरे कान तक जाती हैं
वो जो बीच में एक दिमाग है
और एक ज़ुबान है
वह भी वर्क करता है
ज़बरदस्त वर्क -
सोचके देखिये
सारे नतीजे उसी के हैं ....
यही तो .............

Anita ने कहा…

एक कान से सुनकर दूसरे से नहीं निकालेंगे तो नुकसान भी अपना ही होगा...बुद्धि तो वैसे ही तैयार बैठी है हर चीज में टांग अड़ाने को...वैसे आजकल बच्चे बहुत होशियार होते जा रहे हैं...

सदा ने कहा…

कल 22/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है !
'' तेरी गाथा तेरा नाम ''

वन्दना ने कहा…

वो जो बीच में एक दिमाग है
और एक ज़ुबान है
वह भी वर्क करता है
ज़बरदस्त वर्क -
सोचके देखिये
सारे नतीजे उसी के हैं

्सोलह आने सत्य ………

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

दोनों कान के बीच एक दिमाग भी तो होता है ....

कितनी ऊँची बात कह दी नन्हीं ने...
वाह! सुन्दर रचना दी...
सादर.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

दीदी!
कहीं दिमाग में कुछ कहाल रहा था.. इसलिए वैसा ही दिखा जैसा दिमाग में चल रहा था.. मगर मेरी बात बिटिया के लिए भी वही रहेगी!!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच कहा है ...बहुत मुश्किल है ऐसा करना ... दिमाग नहीं छोड़ता ...

sushma 'आहुति' ने कहा…

bilkul sahi kaha aapne... itna asaan nhi hota..... kuch bhi bhula dena....

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत खूब । ऐसा तो हमने भी कभी नहीं सोचा ।

Maheshwari kaneri ने कहा…

एक कान से सुनो दूसरे से निकाल दो "ये बात सभी कहते है..ये सब उतना आसान नही है ..सही कहा..

रेखा ने कहा…

सही है ...सब कुछ भुला देना ,इतना आसान नहीं होता है .

ऋता शेखर मधु ने कहा…

कान मुँह दिमाग और दिल का गहरा कनेक्शन है...

मनोज कुमार ने कहा…

एक गूढ़ दर्शन की सरल प्रस्तुति।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कान तो ठीक है पर हृदय का क्या करें..

lokendra singh rajput ने कहा…

वाह! नया लॉजिक। दोनों कान के बीच दिमाग और जुबान होती है जो अपना वर्क करते हैं। तभी मैं कहूं कि दिक्कत कहां है क्यों बात आई-गई नहीं होती।

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

बस इतना ,मेरे आने में थोड़ी देर हो गई , इसलिए, मैं , अपरा ,आपसे और सबसे सहमत हूँ... !!

Amrita Tanmay ने कहा…

बिटिया बड़ी बात कह गयी..सच के करीब..

mridula pradhan ने कहा…

वो जो बीच में एक दिमाग है
और एक ज़ुबान है
वह भी वर्क करता है
ज़बरदस्त वर्क -
shanti bhi yahi lata hai ....toofan bhi yahi.....beti ka jabab bahut achcha laga.

Minakshi Pant ने कहा…

खूबसूरत रचना |

sadhana singh ने कहा…

han didi , ham kahte to sab hai ki chhoro n is kaan se suno us kaan se nikal do ..pr hota kahan hai ...agar is kaan se sun kr us kaan se nikal gya hota ...to shyad ye baat hamlog bar-bar doharate hi nahi ..ki chhoro n is kan se suno or us kaan se nikal do ...wo bich ke dinag me baitha hota hai ..isiliye us baat ko bar bar bol kar niakale ki koshis karte hai ...!!

Anupama Tripathi ने कहा…

गहन बात कही है .....किन्तु क्षमा बडन को चाहिए ....प्रभु की नज़रों में क्षमा करने वाला बड़ा और गलती करने वाला छोटा होता है दी ....जिसमे बड़प्पन होता है ...प्रभु बार बार उसका ही इम्तेहान लेते हैं ....शायद उसके बड़प्पन को और बढ़ाने के लिए ...!!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बेहतरीन।

सादर

Atul Shrivastava ने कहा…

सही कहा।
हर बात को भुलाना या टालना संभव नहीं।

Saras ने कहा…

कभी कभी अनजाने ही बच्चे ऐसी बातें कह जाते हैं जो हमारे सारे तर्कों को ताक पर रख देते हैं ...बहुत सुन्दरता और सादगी से कही एक बड़ी बात ....सुन्दर रचना ...बधाई !

Bharat Bhushan ने कहा…

सुंदर और अनहर्टिंग कविता.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

सार सार को गहि रहे थोथा देय उड़ाय
कठिन मगर उत्तम यही सबसे सरल उपाय.

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

सच है अति कटु सच की दिमाग तो केच करता है तो ..पर यही हमें सीखना होता है कि किस तरह से हम निर्विकार भाव से अपने को शांत बना कर रखें... हालाँकि बेहद कठिन है... practice makes a man perfec... मैं भी अभी सीख रही हूँ .. तो आपकी बात से पूर्णतया सहमत हूँ

Anand Dwivedi ने कहा…

जो बातें हर्ट करती हैं
वे आई गई नहीं हो पातीं
न एक कान से दूसरे कान तक जाती हैं
वो जो बीच में एक दिमाग है
और एक ज़ुबान है
वह भी वर्क करता है
ज़बरदस्त वर्क -
सोचके देखिये
सारे नतीजे उसी के हैं ....
....
ओह्ह्ह दीदी कमाल है मज़ा आ गया !

PRIYANKA RATHORE ने कहा…

वो जो बीच में एक दिमाग है
और एक ज़ुबान है
वह भी वर्क करता है
ज़बरदस्त वर्क -
sach hai....