पहलू ….
किसी का भी एक नहीं होता
कृष्ण के भी कई पहलू हैं
अलग अलग पहलुओं का जिम्मेदार
न भगवान् होता है न इंसान !
कृष्ण के पहलू यशोदा की दृष्टि से जो होंगे
वो नन्द बाबा की दृष्टि से अलग ही होंगे
गोपिकाओं की अपनी बात
राधा का अपना प्रेम
ऊधो का अपना ज्ञान
ताड़का,कंस,शकुनी की अपनी सोच !
दुर्योधन ने तो बाँध लेने की धृष्टता दिखाई
कृष्ण के पहलू को कमज़ोर समझा !!
जिस कृष्ण के आगे पूरी सभा स्तब्ध थी
वहां दुर्योधन ने उन्हें 'ग्वाला' कहकर सोचा
कि वह श्रेष्ठ है !!!
कृष्ण तो गीता हैं
और मेरी अम्मा तुम उस गीता का एक महत्वपूर्ण पन्ना हो
जिसने पढ़ा ही नहीं
वह व्याख्या क्या करेगा
और कितनी करेगा !!!
हम तो गोपिकाओं की तरह तुम्हारी शिकायत भी करते रहे
और रहे प्रतीक्षित
कि कब तुम हमारी मटकी का उद्धार करो
ऊधो का ज्ञान हमारे लिए निरर्थक था
हम तो गोपिकाओं की झिड़कियों पर निहाल थे
…………।
अब जब तुम गोकुल छोड़ गई हो
तो जाना - तुम्हारे बिना कैसे रहेंगे !!!!!!!!!!!!!!!






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