
बहुत बड़ी धरती मुझे मिली है
मिला है बहुत बड़ा आकाश
इस छोर से उस छोर तक
क्षितिज का साथ है !
शोर से अधिक एकांत का असर होता है, शोर में एकांत नहीं सुनाई देता -पर एकांत मे काल,शोर,रिश्ते,प्रेम, दुश्मनी,मित्रता, लोभ,क्रोध, बेईमानी,चालाकी … सबके अस्तित्व मुखर हो सत्य कहते हैं ! शोर में मन जिन तत्वों को अस्वीकार करता है - एकांत में स्वीकार करना ही होता है





कभी-कभी ज़िंदगी सांप-सीढ़ी के खेल जैसी होती है। एकबारगी दो-तीन चाल में हम सांपों से बचकर, छोटी-बड़ी सीढ़ियां चढ़कर लाल होने तक पहुंच जाते है...