11 अप्रैल, 2008

मनःस्थिति.........



चाहती हूँ सोना,

एक गहरी नींद-

ताजगी के लिए,

अरसा हो गया,सोयी नहीं।

मैंने यकीनन हर तूफानों का सामना किया है,

इसके बाद भी बंधू,

मुझे डर लगता है!

कैसे समझाऊं मैं कौन थी,

मैं क्या हूँ?

पर-जो भी हूँ,

समय का विश्वास हूँ!

मैं जीवित हूँ या आत्मा हूँ,

मैं खुद नहीं जानती,

पर जो भी हूँ,

मेरी हाथों में ईश्वर का करिश्मा है..........

अधिक सवाल न करो,

मैं निरुत्तर हूँ,

पर तुम्हारी ज़िन्दगी का हल हूँ!

12 टिप्‍पणियां:

  1. रश्मी जी ''मनःस्थिति'' ॰॰॰॰॰॰॰॰ आपकी इस रचना में मन मे उठते विचारों की शानदार अभिव्यक्ति है॰॰॰॰॰॰॰॰खुद को तलाशता मन॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ वाह॰॰॰॰॰ शुभकामनायें

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  2. prashno ki patrika hai fir bhee,
    jindagee ka hal, niruttar hai
    aapki ye rachna hi swayam..
    jo thahar gaye unke liye..
    har prashn ka Uttar hai.....!!

    ...Di khadee shili main saarthak kavita hai..EHSAAS!

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  3. पर जो भी हूँ,



    मेरी हाथों में ईश्वर का करिश्मा है..........



    अधिक सवाल न करो,



    मैं निरुत्तर हूँ,

    hm kuch abhure sawal,bina jawab ke hote hai,kabhi sahi meingehri nind aur akelepan ki talash hoti hai is bhidwali duniya mein,bahut gehre bhav se bhari hai kavita,kuch jahan mein sawal chod gayi,.bahut badhai.

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  4. मैं निरुत्तर हूँ,

    पर तुम्हारी ज़िन्दगी का हल हूँ!

    kitna sundar visharm jaise kavita safar ek abad mandir men rukee ho

    Anil

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  5. aapki kavita ko sirf ek acchi ya gahan soch nahi kah sakta me

    jahan tak maine samjha hai yeh inn sab se badkar kisi satya ki jhalak hai...

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  6. bahut khubsurti se aapne dilke vichar kagaz par utare hain
    aise hi likhti rahiyega.

    nira

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  7. कैसे समझाऊं मैं कौन थी,

    मैं क्या हूँ?

    achchha laga

    avinash

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  8. "कैसे समझाऊं मैं कौन थी,

    मैं क्या हूँ?

    पर-जो भी हूँ,

    समय का विश्वास हूँ!"


    खुद को देखना अपनी आँखों में , ये हुनर सबको कहाँ आता है !!!!

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  9. Aapne Manah Sthiti ko bahut hi behtar sabdo me pradarshit kiya hai. Halaki iis takarh ki kavito ko samajh kar satik comment kar sakne ki kaviliyat abhi tak devlope nahi ho payi hai mujh me but i simply say its nice to go throught a dificult to understand but yet a beautyful creation from your side.

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  10. मैं जीवित हूँ या आत्मा हूँ,

    मैं खुद नहीं जानती,

    पर जो भी हूँ,

    मेरी हाथों में ईश्वर का करिश्मा है..........

    बहुत खूब रश्मि जी

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  11. जीवित हूँ या आत्मा हूँ,

    मैं खुद नहीं जानती,

    पर जो भी हूँ,

    मेरी हाथों में ईश्वर का करिश्मा है..........

    bahut badhiya...

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