16 अप्रैल, 2008

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रामायण है इतनी

रूठते हुए  वचन माँगते हुए  कैकेई ने सोचा ही नहीं  कि सपनों की तदबीर का रुख बदल जायेगा  दशरथ की मृत्यु होगी  भरत महल छोड़  स...