18 जून, 2012

सिकंदर वही होता है !



जो जीता वही सिकंदर
पर हर परिणाम सत्य तो नहीं होता !
अधिकतर सत्य तो बस एड़ियां उचकाता रह जाता है
और परिणाम अपनी मंशा की सत्यता पर इतराता है !
एक सच सत्य का होता है
एक सच झूठ का
.... जीत गया था अर्जुन
कुशल योद्धा भी था
पर कर्ण के आगे फीका था !
सिकंदर अर्जुन कहलाया
पर दुनिया क्या
अर्जुन भी जानता था
कृष्ण को भी ज्ञात था
कि असली सिकंदर कर्ण ही था
.....
किसी भी कहावत का एक ही अर्थ नहीं होता
कह देने से मान्य नहीं होता
जहाँ जीत का पैमाना छल हो
वहाँ हारी हुई बाज़ी के आगे भी
सिकंदर ही होता है
यदि यह सत्य न होता
तो अभिमन्यु को हम हारा हुआ मानते
और चक्रव्यूह की कथा यूँ अमर न होती !
...
पूरब से उगता सूरज डूबता तो है हर दिन
पर फिर आनेवाले कल में
पूरब पर उसी का आधिपत्य होता है
मन ही मन जिसे मानो
सिकंदर वही होता है !

33 टिप्‍पणियां:

  1. यदि यह सत्य न होता
    तो अभिमन्यु को हम हारा हुआ मानते
    और चक्रव्यूह की कथा यूँ अमर न होती !
    अक्षरश: सही कहा है आपने ... गहन भाव लिए उत्‍कृष्‍ट लेखन ... आभार

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  2. सच कहा किसी भी कहावत के एक ही मायने नहीं होते. परिस्थतियों के हिसाब से बदल जाया करते हैं.

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  3. जहाँ जीत का पैमाना छल हो
    वहाँ हारी हुई बाज़ी के आगे भी
    सिकंदर ही होता है

    क्योंकि सत्य कभी सर नहीं झुकाता...उसके निडर जवाबों के आगे निरुत्तर होना ही पड़ता है और वह सिकंदर बनकर डटा रहता है|

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  4. ..हमारे लिए तो आज भी कर्ण एक आदर्श चरित्र है !

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  5. सच कहा दी............
    कभी कभी हारने वाला भी सिकंदर होता है....
    सुन्दर रचना.

    सादर.

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  6. किसी भी कहावत का एक ही अर्थ नहीं होता

    बहुत ही पंक्ति ...सुन्दर रचना ....बधाई

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  7. Jo jita wahi sikandar vyawharik vijetaon ke liye prayukt hota hai n ki aadarsh vijetaon ke liye. Kavita arthpurn aur suspasht hai. Hamesha ki tarah bahut khub likha hai maasi ji aapne.

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  8. Stithi kahawato ko b bdal deti h...sundar post rashmi ji....

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  9. पूरब से उगता सूरज डूबता तो है हर दिन
    पर फिर आनेवाले कल में
    पूरब पर उसी का आधिपत्य होता है
    मन ही मन जिसे मानो
    सिकंदर वही होता है !

    सार्थक ...सुंदर रचना दी ..

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  10. sach hai sikandar wahi h...jo aapke man mastisk par apna prabhav jama le!

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  11. यदि यह सत्य न होता
    तो अभिमन्यु को हम हारा हुआ मानते
    और चक्रव्यूह की कथा यूँ अमर न होती !

    ईमानदारी से जीतने वाला ही सिकंदर कहलाता है ,,

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  12. मन ही मन जिसे मानो
    सिकंदर वही होता है !
    par har man ka sikandar alag alag:)

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  13. मन ही मन जिसे मानो
    सिकंदर वही होता है ! ekdam, solah aane sach....

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  14. जहाँ जीत का पैमाना छल हो
    वहाँ हारी हुई बाज़ी के आगे भी
    सिकंदर ही होता है
    सत्य कथन .... !!

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  15. सच कहा, जो भा जाये वही सिकन्दर..

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  16. पूरब से उगता सूरज डूबता तो है हर दिन
    पर फिर आनेवाले कल में
    पूरब पर उसी का आधिपत्य होता है
    मन ही मन जिसे मानो
    सिकंदर वही होता है !

    जी हाँ .... आधिपत्य उसी का जिसे स्वीकार्यता मिले....

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  17. मनःस्थिति बदले, तब परिस्थिति बदले ।

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  18. वाह कितनी खूबसूरती से सच को स्थापित किया है...

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  19. हर बार जीतने वाला सिकंदर नहीं होता ... सुंदर उदाहरण से काही अपनी बात ... सुंदर प्रस्तुति

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  20. हर तस्वीर का दूसरा रुख भी होता है , कोई एक नियम सब पर समान रूप से लागू नहीं होता तो मुहावरे कैसे होंगे . कुम्हार को तेज धूप चाहिए और किसान को बारिश !
    सिकंदर तो मन का होना ज़रूरी है ...जिस मन को जो भाये , वही उसका सिकंदर !

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  21. जिन्दगी हार कर दिल जीतने वाला सिकंदर ......

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  22. कुछ लोगों के निहित स्वार्थ ने अर्जुन को सिकंदर बनाया था.....कर्ण या एकलव्य उससे कहीं आगे थे और सच्चे विजेता थे ।

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  23. पूरब से उगता सूरज डूबता तो है हर दिन
    पर फिर आनेवाले कल में
    पूरब पर उसी का आधिपत्य होता है
    मन ही मन जिसे मानो
    सिकंदर वही होता है !

    ....बहुत सच कहा है...गहन अभिव्यक्ति...आभार

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  24. तभी तो हार कर जीतने वाला बाज़ीगर कहलाता है ।

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  25. आपके मन की बात है कि आप किसको सिकन्दर मानते हो !

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  26. गहन सोच. सिकंदर भले दुनिया के लिए जो हो पर हमारा मन जिसे चाहे... सुन्दर प्रस्तुति, बधाई.

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  27. जो अपनी तुच्छ इच्छाओं का परित्याग कर समाज में बदलाव ला सके, दुखियों को सहारा दे सके, असहायों का सम्बल बन सके.. सिकंदर वही होता है/ होती है .
    (मैं यहाँ gender biased नहीं होना चाहता) :)
    सादर

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  28. मन ही मन जिसे मानो
    सिकंदर वही होता है !..sahi hai ..

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