
ये दो नज्में इमरोज़ जी ने भेजी है...........एक अपर्णा की है, और दूसरी नज़्म अपर्णा की नज़्म के जवाब में इमरोज़ की है .
अपर्णा का पता उनसे खो गया और वे यह नज़्म उसे भेज नहीं सके......यह उनका प्रयास है मेरे द्वारा उन्हें ढूँढने का......मुझे
विश्वास है- यह प्रयास सफल होगा, जो उनकी नज़्म से वाकिफ होंगे उनके द्वारा अपर्णा तक यह बात पहुंचेगी..
अमृता
कल सपने में
मैं तुम्हारे प्रेमी से
मिलने जा रही थी
लेकिन
सपना टूट गया
और मिल नहीं पायी !
मैं मायूस हो गई
फिर मैंने दूसरा सपना देखा-
सपने में मैं सोकर उठी
तो सामने देखा- तुम्हारा प्रेमी !
मैंने आँखें बन्द कर लीं
फिर खोलीं
सामने था -मेरा प्रेमी !
मैंने फिर आँखें बन्द कीं
फिर खोलीं
फिर सामने - तुम्हारा प्रेमी !
पूरे सपने में यह सिलसिला चलता रहा
दोनों मुझे प्यार से देखते रहे !
अब आज तुम्हारा प्रेमी
मेरा प्रेमी बन गया है
और तुम
अ--मृता हो मुझमें !
अपर्णा
एक अमृता
तो मैं अब भी
जी रहा हूँ...
प्यार की खुशबू - अमृता ......
अमृता से अपर्णा तक
और ना जाने
कितने दिलों तक फैली हुई
ये खुशबू
कभी चाहत बनकर
कभी सपना बनकर
खामोश
पर जी रही है ....
इस अमृता का
कभी राधा नाम रहा
कभी मीरा
कभी हीर कभी सोहणी
और एक अपर्णा भी है ...
नाम ही बदलते हैं
प्यार नहीं बदलता ...
इमरोज़