16 नवंबर, 2007

ज़रूरी है



तुम बीमार हो,
इसके लिए बीमार दिखाई देना ज़रूरी है.
तुम्हारी सारी खुशियाँ ख़त्म हो गयी,
इसके लिए निरंतर आँसू बहाना ज़रूरी है
तुम बिना सब्जी के रोटी- चावल खा रहे हो,
तो तुम्हे अपने चेहरे की चमक को खोना पड़ेगा
तुम आर्थिक कठिनाइयों के दौर से गुज़र रहे हो
तो तुम्हे अपनी फटेहाली तो दिखानी ही होगी.
अगर - तुम अपनी बीमारी में भी सारे काम निपटा सकते हो
पूरी तत्परता एवं लगन से चल सकते हो
तो ये भी क्या बीमारी हुई!
तुम्हारे पास खुशी नही
और तुम मुस्कुरा सकते हो
अपने निकट आये व्यक्ति को खुशी दे सकते हो
हँसा सकते हो
फिर तो,उंगलियाँ उठेंगी ही!
तुम खा रहे हो रोटी-चावल
और चमक है मेवे और अंगूर की
तो क्यों समझेगा कोई कि तुम हर हाल में खुश हो?
बहुत ज़रूरी है,
फटेहाल दिखना,
निरंतर आँसू बहाना,
चेहरे की चमक को खोना...
उन लोगों के लिए- जो बेचैन हैं,
तुम्हे इस हाल में देखने के लिए!

1 टिप्पणी:

  1. तुम खा रहे हो रोटी-चावल
    और चमक है मेवे और अंगूर की
    तो क्यों समझेगा कोई कि तुम हर हाल में खुश हो?
    बहुत ज़रूरी है,
    फटेहाल दिखना,
    निरंतर आँसू बहाना,
    चेहरे की चमक को खोना...
    उन लोगों के लिए- जो बेचैन हैं,
    तुम्हे इस हाल में देखने के लिए!

    acchi baat aur aaj key samaj me shayaad kahi na kahi sachi bhii

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शाश्वत कटु सत्य ... !!!

जब कहीं कोई हादसा होता है किसी को कोई दुख होता है परिचित अपरिचित कोई भी हो जब मेरे मुँह से ओह निकलता है या रह जाती है कोई स्तब्ध...