18 सितंबर, 2019

ज़िन्दगी एक चमत्कार




दिल कर रहा है,
मन की तमाम विपरीत स्थितियों से,
खुद को अपरिचित कर लूँ,
बैठ जाऊँ किसी नदी के किनारे
और पूछूं,
मछली मछली कितना पानी ।
नदी में पैर डालकर छप छप करूँ,
कागज़ की नाव में रखकर कुछ सपने
नदी में डाल दूँ,
देखती रहूँ उसकी चाल
तबतक,जबतक वह चलने का मनोबल रखे !
डूबना तो सबको है एक दिन,
कागज़ की नाव भी डूबेगी,
पर इतना प्रबल विश्वास है
कि जिस छोर भी डूबेगी,
वहाँ सपनों को एक आधार दे जाएगी ।
जी हाँ,
ज़िन्दगी एक चमत्कार है,
रहस्यों का भंडार है,
मिलिए एकांत से
- देखिए चमत्कार,
मन की विपरीत स्थितियों को मिलेगी अनुकूलता,
...मेरा यह विश्वास न कभी डगमगाया था,
न डगमगाएगा,
खुद आजमा लीजिये,
फिर कीजिये उसे साझा,
... बिना किसी बाधा के,
यह है एक सहज रास्ता। ...

8 टिप्‍पणियां:

  1. चमत्कार पर यकीन है तभी तो साँसों की डोर नहीं टूटती है...

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल गुरुवार (19-09-2019) को      "दूषित हुआ समीर"   (चर्चा अंक- 3463)     पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. रास्ते सहज होते हैं बस हम असहज हो जाते हैं।

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  4. आपकी सकारात्मक सोच को सलाम❤️

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  5. खुद से मिल पाने का खुद से बतिया लेने का और खुद में खुदी को ढूँँढ लेने का सलीका सीखना है मुझे आपसे ! सिखाएंगी ना मुझे !

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  6. ऐसी सहजता से कहना भी चमत्कार से कम है क्या ।

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